बिना बेहोश किए हुआ Kidney Transplant, दिल्ली के ILBS अस्पताल में सफल सर्जरी
Sandesh Wahak Digital Desk: मरीज को बेहोश किए बिना किडनी ट्रांसप्लांट (Kidney Transplant) होना सुनने में भले ही अजीब लगे, लेकिन दिल्ली के इंस्टीट्यूट ऑफ लिवर एंड बाइलरी साइंसेज (ILBS) में डॉक्टरों ने यह कर दिखाया है। ट्रांसप्लांट के बाद मरीज पूरी तरह स्वस्थ है और रिकवरी कर रहा है। मेडिकल भाषा में इस तरह की सर्जरी को अवेक किडनी ट्रांसप्लांट कहा जाता है। आमतौर पर किडनी ट्रांसप्लांट जनरल एनेस्थीसिया देकर किया जाता है जिसमें मरीज को पूरी तरह बेहोश किया जाता है, लेकिन इस मामले में मरीज को पूरी तरह बेहोश नहीं किया गया था।
एपिड्यूरल एनेस्थीसिया देकर की गई सर्जरी
दरअसल इस सर्जरी में मरीज को एपिड्यूरल एनेस्थीसिया दिया गया था। इस प्रक्रिया में शरीर के निचले हिस्से को सुन्न किया जाता है जबकि मरीज की सांस और होश पूरी तरह सामान्य रहते हैं। हालांकि इस तरह की एनेस्थीसिया देने से पहले मरीज से अनुमति ली जाती है। मरीज की सहमति और डॉक्टरों की पूरी जांच के बाद ही इस तरह की सर्जरी की जाती है क्योंकि हर मरीज इस तरह बिना बेहोश हुए सर्जरी नहीं करा सकता है।
हाई रिस्क मरीजों के लिए बेहतर विकल्प
आईएलबीएस (ILBS) अस्पताल में सर्जरी करने वाले डॉ. अभियुत्थन सिंह जादौन के अनुसार अधिकतर मरीजों को जनरल एनेस्थीसिया दिया जाता है, लेकिन कुछ मरीज ऐसे होते हैं जिनमें दिल, फेफड़े या अन्य गंभीर बीमारियों के कारण जनरल एनेस्थीसिया का खतरा ज्यादा होता है। ऐसे हाई रिस्क मरीजों के लिए एपिड्यूरल एनेस्थीसिया एक बेहतर विकल्प होता है। इस तरह की सर्जरी में ERAS प्रोटोकॉल को भी फॉलो किया जाता है जिससे मरीज की रिकवरी तेज होती है।
कम समय में अस्पताल से मिल जाती है छुट्टी
इस तकनीक की मदद से मरीज को अस्पताल में लंबे समय तक भर्ती रहने की जरूरत नहीं होती है। आमतौर पर किडनी ट्रांसप्लांट (Kidney Transplant) के बाद मरीज को लंबे समय तक अस्पताल में रहना पड़ता है, लेकिन इस तकनीक से मरीज को 3 से 5 दिन में ही छुट्टी मिल सकती है। इस सर्जरी के बाद मरीज अगले ही दिन चलने फिरने लगा और मुंह से खाना भी शुरू कर दिया। डॉक्टरों का कहना है कि अवेक किडनी ट्रांसप्लांट बुजुर्ग मरीजों और गंभीर बीमारियों से जूझ रहे लोगों के लिए उम्मीद की नई किरण है जिन्हें पहले ट्रांसप्लांट के लिए अनफिट माना जाता था।
2024 में हुआ था पहला अवेक Kidney Transplant
दरअसल दुनिया का पहला अवेक किडनी ट्रांसप्लांट (Awake Kidney Transplant) साल 2024 में अमेरिका के शिकागो में किया गया था। इसमें 28 साल के एक मरीज का ट्रांसप्लांट किया गया था। इस सर्जरी के दौरान मरीज को रीढ़ में सुन्न करने का इंजेक्शन दिया गया था जिससे पूरी सर्जरी के दौरान मरीज होश में रहा था।

