जानें क्यों गिर रहा है विदेशी मुद्रा भंडार, 4 महीने में 6.8 लाख करोड़ की हुई गिरावट
Sandesh Wahak Digital Desk : रिजर्व बैंक के पास फॉरेक्स रिजर्व 2025 के तीसरे सप्ताह में घटकर $624 बिलियन पर आ गया, जो मार्च 2024 के बाद का सबसे निचला स्तर है. यह गिरावट सितंबर 2024 के आखिरी सप्ताह में रिकॉर्ड $704.9 बिलियन से हुई है.
भारतीय फॉरेक्स रिजर्व में तेजी से हो रही कमी RBI द्वारा अपनी करेंसी को स्थिर रखने के लिए की जा रही लगातार विदेशी करेंसी की बिक्री को दिखाता है. इस कमी के बावजूद, करेंसी का वैल्यू गिरता जा रहा है.
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देश का फॉरेक्स रिजर्व गिरने के कई कारण हो सकते हैं. जिसमें…
वैश्विक आर्थिक अस्थिरता
भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) रुपये की गिरती कीमत को स्थिर रखने के लिए डॉलर बेचता है. जब विदेशी निवेश कम होता है या बाजार में डॉलर की मांग बढ़ जाती है, तो RBI को अपने भंडार से डॉलर निकालकर बाजार में डालना पड़ता है ताकि रुपये को ज्यादा गिरने से बचाया जा सके. लेकिन इससे देश का विदेशी मुद्रा भंडार घटने लगता है.
भारतीय रुपया 1 अक्टूबर 2024 को ग्रीनबैक के मुकाबले 83.8213 से घटकर 27 जनवरी को अमेरिकी डॉलर के मुकाबले 86.3550 पर आ गया. पिछले तीन महीनों में, भारतीय रुपया अमेरिकी डॉलर के मुकाबले करीब 2.97 प्रतिशत कमजोर हुआ है.
रुपये की कीमत को बचाने का दबाव
भारत में विदेशी निवेश (FDI और FPI) की इनफ्लो पहले की तुलना में घट रही है. विदेशी निवेशक अगर भारत की ग्रोथ संभावनाओं को कमज़ोर समझते हैं या उन्हें दूसरे देशों में बेहतर रिटर्न मिलता है, तो वे अपना पैसा भारत से निकालकर अन्य देशों में निवेश कर देते हैं. इससे भारत में डॉलर की इनकमिंग घट जाती है और फॉरेक्स रिजर्व कम होने लगता है.
वित्त वर्ष 2023-24 में कुल FII (Foreign Institutional Investment) प्रवाह ₹3,39,064.6 करोड़ रहा, जबकि 2024-25 में अब तक यह केवल ₹86,875.89 करोड़ दर्ज किया गया है. इस तुलना से पता चलता है कि चालू वित्त वर्ष में अब तक विदेशी निवेश की गति धीमी रही है. है.
विदेशी निवेश में कमी
भारत में विदेशी निवेश (FDI और FPI) की इनफ्लो पहले की तुलना में घट रही है. विदेशी निवेशक अगर भारत की ग्रोथ संभावनाओं को कमजोर समझते हैं या उन्हें दूसरे देशों में बेहतर रिटर्न मिलता है, तो वे अपना पैसा भारत से निकालकर अन्य देशों में निवेश कर देते हैं. इससे भारत में डॉलर की इनकमिंग घट जाती है और फॉरेक्स रिजर्व कम होने लगता है.
वित्त वर्ष 2023-24 में कुल FII (Foreign Institutional Investment) प्रवाह ₹3,39,064.6 करोड़ रहा, जबकि 2024-25 में अब तक यह केवल ₹86,875.89 करोड़ दर्ज किया गया है. इस तुलना से पता चलता है कि चालू वित्त वर्ष में अब तक विदेशी निवेश की गति धीमी रही है.

