बाढ़ आने से पहले ‘जंग’ की तैयारी, कुशीनगर में NDRF ने छोटी गंडक में किया मॉकड्रिल
पडरौना (कुशीनगर): मानसून और बाढ़ की आहट से पहले प्रशासनिक अमला अलर्ट मोड पर है। शुक्रवार को हेतिमपुर में एनडीआरएफ (NDRF) की 11वीं बटालियन ने एक भव्य ‘मोबलाइजेशन ड्रिल’ का आयोजन किया। इस अभ्यास का मुख्य उद्देश्य बाढ़ जैसी आपदा के समय ग्रामीणों और स्थानीय प्रशासन की तैयारियों को परखना और उन्हें जीवन रक्षा के तरीके सिखाना था।

नदी के बीच दिखे रेस्क्यू के 5 रूप
दोपहर एक बजे जैसे ही ड्रिल शुरू हुई, जवानों ने नदी के बीच एक-एक कर पांच अलग-अलग संकटपूर्ण स्थितियों का सजीव चित्रण किया।
नाव पलटने पर रेस्क्यू: दिखाया गया कि अगर अचानक नाव पलट जाए, तो एनडीआरएफ की टीम कितनी तेजी से वहां पहुंचकर लोगों को बाहर निकालती है।
क्षमता से अधिक यात्री: एक दृश्य में दिखाया गया कि अगर किसी नाव में क्षमता से ज्यादा लोग सवार हों और दुर्घटना हो जाए, तो फौरन प्राथमिक चिकित्सा (First Aid) कैसे दी जाती है।
गोताखोरों का कमाल: नदी की गहराई में डूबे व्यक्ति को ढूंढने के लिए गोताखोरों ने अपनी कुशलता का प्रदर्शन किया।
जीवन रक्षक CPR: जवानों ने वैज्ञानिक तरीके से ‘सीपीआर’ देना सिखाया, जो पानी से निकाले गए बेहोश व्यक्ति की जान बचाने में सबसे कारगर है।

घरेलू सामान से बनें ‘लाइफ जैकेट’
इस ड्रिल की सबसे खास बात यह रही कि जवानों ने ग्रामीणों को बताया कि अगर उनके पास आधुनिक लाइफ जैकेट नहीं है, तो वे घर में पड़ी खाली बोतलों, डिब्बों और अन्य कबाड़ के सामान से कैसे अपनी जान बचाने के लिए तैरने वाले उपकरण बना सकते हैं।
आपदा के समय खुद बनें अपनी ढाल
कसया तहसीलदार धर्मवीर सिंह ने बताया कि कुशीनगर का यह क्षेत्र बाढ़ के प्रति बेहद संवेदनशील है। उन्होंने कहा, “हमारा मकसद ग्रामीणों को इतना प्रशिक्षित करना है कि वे आपदा के समय मदद आने तक खुद को और अपने परिवार को सुरक्षित रख सकें।”
यह पूरा अभ्यास एनडीआरएफ के उपमहानिरीक्षक मनोज कुमार शर्मा के मार्गदर्शन और निरीक्षक धीरेंद्र सिंह के नेतृत्व में संपन्न हुआ। इस दौरान एसडीएम कसया संतराज सिंह, एडीएम (आपदा), और आपदा विशेषज्ञ रवि कुमार राय सहित बड़ी संख्या में ग्रामीण और जवान मौजूद रहे।
रिपोर्ट: राघवेंद्र मल्ल
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