गौरव गोगोई के वार पर ललन सिंह का पलटवार, ऑपरेशन सिंदूर पर संसद में गरमाई बहस

Sandesh Wahak Digital Desk: लोकसभा में सोमवार को जम्मू-कश्मीर के पहलगाम आतंकी हमले और उसके बाद हुए ‘ऑपरेशन सिंदूर’ को लेकर तीखी बहस देखने को मिली। चर्चा की शुरुआत रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने की, जो 16 घंटे तक चलने वाली इस विशेष चर्चा का हिस्सा हैं। संभावना है कि यह बहस तीन दिन तक चलेगी। संसद की कार्यवाही के हर अपडेट पर देश की नजरें टिकी हुई हैं।

सेना को सलाम, पर सवाल भी कई

शिवसेना (उद्धव गुट) के सांसद अरविंद सावंत ने सबसे पहले भारतीय सेना को नमन करते हुए कहा सेना का शौर्य बेमिसाल है, लेकिन सवाल यह है कि पहलगाम हमले के वक्त वहां पर्याप्त सुरक्षा क्यों नहीं थी? किसके आदेश पर वहां से जवान हटा लिए गए थे? उन्होंने मांग की कि जांच वहीं से शुरू होनी चाहिए।

कांग्रेस सांसद गौरव गोगोई ने सरकार से कई तीखे सवाल पूछे

सांसद गोगोई ने कहा कि हमले को 100 दिन हो गए, लेकिन 5 मुख्य आतंकवादी अब भी फरार हैं। क्यों? उन्होंने सरकार पर ड्रोन, सैटेलाइट, CRPF, BSF जैसी तमाम संसाधनों के बावजूद नाकामी का आरोप लगाया। बैसरन इलाके में एंबुलेंस एक घंटे बाद पहुंची, सेना को पैदल चलकर जाना पड़ा, यह भी उन्होंने गंभीर विफलता बताया।

गोगोई ने यह भी सवाल उठाया कि पहले 21 आतंकी ठिकानों को निशाना बनाने की बात थी, लेकिन बाद में ये घटकर 9 कैसे रह गए? उन्होंने सीजफायर को लेकर भी सरकार की मंशा पर सवाल उठाते हुए कहा कि अगर पाकिस्तान झुकने को तैयार था, तो ऑपरेशन को बीच में क्यों रोका गया? सरकार ने ट्रंप की बातों के आगे झुककर बड़ा मौका गंवा दिया।

सरकार का पलटवार

जेडीयू के वरिष्ठ नेता और सांसद ललन सिंह ने सरकार की रणनीति का बचाव करते हुए कहा पीएम मोदी ने हमले के दो दिन बाद ही आतंकवाद के खिलाफ सख्त संकल्प लिया और अपनी विदेश यात्रा रद्द कर वापस लौटे। उन्होंने बताया कि सेनाओं को खुली छूट दी गई थी, और 6-7 मई की रात को ऑपरेशन सिंदूर में पाकिस्तान के आतंकी ठिकानों को ध्वस्त किया गया। उन्होंने कांग्रेस पर पलटवार करते हुए कहा 2004 से 2014 के बीच आतंकवाद सबसे ज्यादा बढ़ा, 615 लोगों की जान गई। आज सवाल पूछने वालों ने तब क्या किया?

विपक्ष का सवाल: आखिर पहलगाम हमले के दोषी कहां हैं?

समाजवादी पार्टी के सांसद रमाशंकर राजभर ने कहा  18 दिन बाद जवाबी कार्रवाई की गई, लेकिन सरकार ने यह नहीं बताया कि जिन 100 आतंकियों को मारा गया, उनमें पहलगाम हमले के मुख्य आरोपी शामिल थे या नहीं? उन्होंने यह भी कहा कि ऑपरेशन सिंदूर को तीन दिन में खत्म कर दिया गया, जो कि जल्दबाजी थी।

संसद में चल रही इस बहस के जरिए साफ हो गया है कि एक तरफ जहां देश सेना के पराक्रम पर गर्व कर रहा है, वहीं दूसरी तरफ विपक्ष जवाब मांग रहा है क्या हमले के असली गुनहगार मारे गए या अब भी जिंदा हैं? पाकिस्तान को सीजफायर का फायदा क्यों मिला? और ऑपरेशन आधे में क्यों रोका गया? यह बहस अभी जारी है, और आने वाले दो दिनों में और भी बयान, तर्क और जवाब सामने आ सकते हैं।

 

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