Land for Job Case में लालू यादव और राबड़ी देवी ने खुद को बताया निर्दोष, करेंगे मुकदमे का सामना

Sandesh Wahak Digital Desk: राष्ट्रीय जनता दल प्रमुख लालू प्रसाद यादव और पूर्व बिहार मुख्यमंत्री राबड़ी देवी ने सोमवार को कथित रेलवे लैंड फॉर जॉब भ्रष्टाचार मामले (Land for Job Case) में खुद को निर्दोष बताया और मुकदमे का सामना करने की इच्छा जताई। यह मामला केंद्रीय जांच ब्यूरो द्वारा जांच के दायरे में है। दोनों नेता दिल्ली स्थित राउज एवेन्यू कोर्ट में पेश हुए और भ्रष्टाचार, धोखाधड़ी तथा आपराधिक साजिश के आरोपों को खारिज करते हुए केस को मेरिट पर लड़ने का फैसला किया।

चार्ज फ्रेमिंग के लिए पेश होने की मिली थी अनुमति

इससे पहले 29 जनवरी को Land for Job Case में ट्रायल कोर्ट ने राष्ट्रीय जनता दल के नेताओं लालू प्रसाद यादव, राबड़ी देवी, तेजस्वी यादव और तेज प्रताप यादव को 1 फरवरी से 25 फरवरी के बीच चार्ज फ्रेमिंग की प्रक्रिया के लिए कोर्ट में पेश होने की अनुमति दी थी। कोर्ट ने आरोपियों को कम से कम एक दिन पहले सूचना देकर पेश होने का निर्देश दिया था और 9 मार्च को ट्रायल शुरू करने की तारीख तय की थी।

आपराधिक साजिश का हिस्सा होने का प्रथम दृष्टया आधार

जनवरी में Land for Job Case में स्पेशल जज ने लालू प्रसाद यादव और उनके परिवार के सदस्यों के खिलाफ आरोप तय करते हुए कहा था कि वे कथित रूप से एक आपराधिक नेटवर्क की तरह काम कर रहे थे। कोर्ट के अनुसार मामले में सार्वजनिक रोजगार को कथित तौर पर सौदेबाजी के रूप में इस्तेमाल किया गया और इसके बदले अचल संपत्तियां हासिल की गईं। कोर्ट ने कहा कि जांच एजेंसी की चार्जशीट प्रथम दृष्टया दिखाती है कि लालू प्रसाद यादव के करीबी सहयोगियों ने देश के अलग अलग हिस्सों में रेलवे नौकरी के बदले जमीन हासिल करने में मदद की।

कोर्ट ने खारिज की आरोपियों की डिस्चार्ज याचिका  

कोर्ट ने आरोपियों की डिस्चार्ज याचिका खारिज करते हुए कहा कि उन्हें मामले से बाहर करने की मांग पूरी तरह अनुचित है। कोर्ट के आदेश के अनुसार केस में नामित 98 जीवित आरोपियों में से 46 के खिलाफ आरोप तय किए गए हैं, जिनमें लालू प्रसाद यादव और उनके परिवार के सदस्य शामिल हैं, जबकि 52 आरोपियों को डिस्चार्ज कर दिया गया है। इस मामले में पांच आरोपियों की मृत्यु के बाद उनके खिलाफ कार्यवाही समाप्त हो चुकी है।

रेलवे मंत्री रहने के दौरान भ्रष्टाचार के आरोप

दरअसल Land for Job Case का यह मामला 2004 से 2009 के बीच के कथित बड़े स्तर के भ्रष्टाचार से जुड़ा है, जब लालू प्रसाद यादव केंद्रीय रेल मंत्री थे। जांच एजेंसी के अनुसार भारतीय रेल में नौकरी देने के बदले जमीन ली गई। आरोप है कि जमीन के टुकड़े लालू प्रसाद यादव के परिवार और उनसे जुड़ी एक कंपनी के नाम पर बाजार मूल्य से कम कीमत पर और ज्यादातर नकद लेनदेन के जरिए लिए गए।

इसी बीच प्रवर्तन निदेशालय पटना में जमीन ट्रांसफर से जुड़े कथित मनी लॉन्ड्रिंग एंगल की भी जांच कर रहा है। मामले में जमीन के सौदों और वित्तीय लेनदेन की कड़ियों को खंगाला जा रहा है।

 

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