जमीन रजिस्ट्री में अब नहीं चलेगा फर्जीवाड़ा: 1 फरवरी से यूपी की सभी तहसीलों में लागू होगा ‘आधार प्रमाणीकरण’
पडरौना, कुशीनगर: जमीन की खरीद-बिक्री में होने वाली धोखाधड़ी और असली मालिक की जगह किसी दूसरे को खड़ा कर रजिस्ट्री कराने (छद्म रजिस्ट्री) के खेल पर अब पूरी तरह लगाम लगने वाली है। उत्तर प्रदेश सरकार के निर्देश पर स्टाम्प एवं रजिस्ट्रेशन विभाग आगामी 1 फरवरी, 2026 से सूबे की सभी तहसीलों में आधार प्रमाणीकरण (Aadhaar Authentication) की व्यवस्था को अनिवार्य रूप से प्रभावी करने जा रहा है।
क्यों पड़ी इस नई व्यवस्था की जरूरत?
अक्सर देखा जाता है कि भू-माफिया या जालसाज किसी की कीमती जमीन को फर्जी गवाहों और फर्जी पहचान पत्रों के जरिए किसी और के नाम कर देते थे। कई बार असली मालिक को पता भी नहीं चलता था और उसकी जमीन बिक जाती थी। अब नई उत्तर प्रदेश ऑनलाइन दस्तावेज पंजीकरण नियमावली, 2024 के तहत, जमीन बेचने वाले, खरीदने वाले और गवाहों की पहचान ‘इलेक्ट्रॉनिक’ रूप से स्थापित की जाएगी।
कैसे काम करेगी नई प्रक्रिया?
सहायक निरीक्षक निबंधन बी.एस. वर्मा ने बताया कि कुशीनगर जिले की सभी तहसीलों (पडरौना सदर, हाटा, कसया, तमकुहीराज, कप्तानगंज और खड्डा) में इसकी तैयारी पूरी कर ली गई है।
- अब दस्तावेजों पर आधार आधारित ई-हस्ताक्षर (e-Sign) को ही कानूनी मान्यता मिलेगी।
- सॉफ्टवेयर के माध्यम से पहले सभी विवरण ऑनलाइन दर्ज किए जाएंगे।
- रजिस्ट्री के दिन पक्षकारों और गवाहों के अंगूठे के निशान (Biometric) का मिलान सीधे आधार के डेटाबेस से किया जाएगा। यदि व्यक्ति वही नहीं है जिसका आधार है, तो सिस्टम उसे तुरंत पकड़ लेगा।
- बायोमेट्रिक सत्यापन के तुरंत बाद मौके पर ही फोटो खींचकर पोर्टल पर अपलोड की जाएगी।
मुख्यमंत्री का विज़न: ‘पारदर्शिता और सुरक्षा’
अगस्त 2025 में मुख्यमंत्री की अध्यक्षता में हुई बैठक में इस पर अंतिम मुहर लगी थी। इसका मुख्य उद्देश्य रजिस्ट्रेशन अधिनियम, 1908 के प्रावधानों को डिजिटल युग के अनुरूप सुरक्षित बनाना है। इस व्यवस्था से न केवल फर्जीवाड़ा रुकेगा, बल्कि आम आदमी का संपत्ति पंजीकरण पर भरोसा भी बढ़ेगा।
रिपोर्ट: राघवेंद्र मल्ल
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