Lucknow News: डॉ. सुल्तान शाकिर हाशमी का काव्य-संग्रह अक्स-ए-कुरआन का लोकार्पण
Lucknow News: इस्लामिक सेंटर ऑफ इंडिया ईदगाह में डॉ. सुल्तान शाकिर हाशमी के हम्द, नात और मनक़बत का काव्य-संग्रह ‘अक्स-ए-कुरआन’ का भव्य लोकार्पण सम्पन्न हुआ। यह आयोजन न केवल साहित्यिक व अकादमिक जगत के लिए ऐतिहासिक अवसर साबित हुआ बल्कि डॉ. सुल्तान शाकिर हाशमी की बहुआयामी साहित्यिक और शैक्षिक सेवाओं को नई रोशनी में प्रस्तुत किया।
कार्यक्रम की अध्यक्षता न्यायमूर्ति अता-उर-रहमान मसूदी ने की। क़ारी तरीक़-उल-इस्लाम की तिलावत-ए-क़ुरआन से कार्यक्रम का शुभारंभ हुआ। डॉ सुल्तान शाकिर हाशमी द्वारा लिखित हम्द डॉ. मंसूर हसन ख़ान ने प्रस्तुत की और संचालन के दायित्व मौलाना ज़फरुद्दीन नदवी ने कुशलतापूर्वक निभाए।
इस अवसर पर मौलाना ख़ालिद रशीद फ़रंगी महली, चेयरमैन इस्लामिक सेंटर ऑफ इंडिया ने डॉ. सुल्तान शाकिर हाशमी को बधाई देते हुए कहा कि “हम्द, नात और मनक़बत की काव्य रचना केवल एक कला नहीं बल्कि ख़ुदा की देन है जो हर किसी को नसीब नही होती, जो केवल अल्लाह की विशेष कृपा से संभव होती है। डॉ. सुल्तान शाकिर हाशमी ने अपनी कविताओं के माध्यम से आस्था और प्रेम के ऐसे दीप जलाए हैं जो पीढ़ी-दर-पीढ़ी ईमान की गर्माहट को जीवित रखेंगे।”
मौलाना सैयद बिलाल अब्दुल हई हसनी नदवी, नाज़िम नदवतुल उलमा लखनऊ यद्यपि अस्वस्थता के कारण शामिल नहीं हो सके, लेकिन उन्होंने अपने विचार लिखित रूप में भेजे, जिन्हें सभा में पढ़कर सुनाया गया। इसके अतिरिक्त मौलाना अब्दुल अली फ़ारूक़ी (नाज़िम, दारुल उलूम फ़ारूक़िया, काकोरी), मौलाना कफ़ील अशरफ़, प्रोफेसर डॉ. ख़ान मोहम्मद आतिफ़, प्रोफेसर सैयद वसीम अख्तर (चांसलर, इंटेग्रल यूनिवर्सिटी) और जस्टिस अता-उर-रहमान मसूदी ने भी अपने विचार रखते हुए डॉ. सुल्तान शाकिर हाशमी को मुबारकबाद पेश की। उन्होंने डॉ हाशमी से अपने पुराने सम्बन्धों का ज़िक्र करते हुए उनकी साहित्यिक ख़िदमात एवं उनकी पत्रकारिता का उल्लेख करते हुए उन्हें एक इमानदार एवं निष्पक्ष कलमकार बताया।

आसिम वक़ार ने इस ऐतिहासिक अवसर को साहित्यिक इतिहास का एक उज्ज्वल अध्याय बताते हुए डॉ सुल्तान शाकिर हाशमी के साहित्य एवं उनकी पत्रकारिता को समाज का दर्पण बताया। ग़ौरतलब है कि डॉ. सुल्तान शाकिर हाशमी केवल एक कवि, शायर ही नहीं, बल्कि एक शोधकर्ता, आलोचक, वरिष्ठ पत्रकार और बहुमुखी प्रतिभा के साहित्यकार हैं। उन्होंने उर्दू, हिंदी और अंग्रेज़ी– तीनों भाषाओं में पचास से अधिक पुस्तकें लिखी हैं। उनकी रचनाएँ धार्मिक आस्था से लेकर समसामयिक विषयों तक का विस्तृत दायरा समेटे हुए हैं। उनकी गद्य और पद्य दोनों में एक ऐसा संतुलन और वैचारिक गहराई पाई जाती है जो पाठक को केवल प्रभावित ही नहीं करती बल्कि बौद्धिक स्तर पर झकझोर देती है।
‘अक्स-ए-कुरआन’ वास्तव में उनकी आध्यात्मिक निष्ठा और क़ुरआनी चिंतन से गहरी लगन का प्रतीक है। इस संग्रह में शामिल हम्दीय काव्य सृष्टिकर्ता के प्रति सच्ची अकी़दत का इज़हार है, नातीया रचनाएँ पैग़म्बर मोहम्मद के प्रति उत्कृट प्रेम की अभिव्यक्ति हैं और मनक़बती शेर औलिया व सूफ़िया के जीवन-चरित से हृदय को सुवासित करते हैं। यही कारण है कि यह संग्रह यह दर्शाता है कि डॉ. सुल्तान शाकिर हाशमी की सृजनात्मक शक्ति केवल शब्दों का खेल नहीं बल्कि आस्था, प्रेम और समाज सेवा तथा समाज को दिशा देने का साधन है।
साहित्यिक जगत का कहना है कि डॉ. सुल्तान शाकिर हाशमी एक जीवित पुस्तकालय की तरह हैं, जिन्होंने अपनी लेखनी से न केवल साहित्य की दुनिया को समृद्ध किया है बल्कि नई पीढ़ी को भी ज्ञान का रसास्वादन और चिंतन की व्यापकता प्रदान की है।
कार्यक्रम में उपस्थित विद्वानों ने इस बात पर प्रसन्नता व्यक्त की कि आज के भौतिकतावादी वातावरण में भी ऐसे रचनाकार मौजूद हैं जो अपनी सृजनाओं के माध्यम से लोगों को क़ुरआन, ईमान और पैग़म्बर-प्रेम की ओर आकर्षित कर रहे हैं। समारोह में बड़ी संख्या में वरिष्ठ साहित्यकार, पत्रकार, बुद्धजीवी एवं समाजसेवी मौजूद थे जिन्होंने डॉ सुल्तान शाकिर हाशमी की लेखनी की जमकर तारीफ की और एक सफल आयोजन के लिए बधाई दी।

