एसडीएम के पेशकार पर वकीलों ने लगाये गंभीर आरोप
Lucknow News: राजधानी लखनऊ के मलिहाबाद तहसील में तैनात उपजिलाधिकारी के पेशकार पर गंभीर आरोप लगाते हुए वकीलों ने उनके स्थानांतरण किये जाने की मांग प्रशासन से की है। वकीलों का आरोप है की पेशकार एक दशक से यहीं तैनात है, साथ ही क्षेत्रीय होने के चलते सरकारी कार्यों एवं राजस्व न्यायालय की कार्यवाही में अनुचित हस्ताक्षेप कर न्यायिक निष्पक्षता को प्रभावित कर रहा है।
एक दशक से अधिक समय से विभिन्न पटलों पर तैनात एसडीएम के पेशकार गंगा प्रशाद मौर्य पर तहसील के वकील सर्वेश कुमार यादव सहित आधा दर्जन वकीलों ने आरोप लगाया है कि उक्त पेशकार क्षेत्रीय व्यक्ति है। जो मलिहाबाद के ग्राम हटौली का रहने वाला है। वह इसका फायदा उठा अपने सगे संबंधियों को तहसील के राजस्व से जुड़े कार्यों के ठेके लेता है। पक्षपात पूर्ण व्यवहार भी करते है। जिससे निष्पक्ष प्रशासन की भावना प्रभावित होती है। वकीलों ने दी अपनी शिकायत में दो मुकदमों (वादों) का भी जिक्र कर पेशकार पर गंभीर आरोप लगाये है। वकीलों का आरोप है कि उक्त पेशकार राजस्व वादों में अनुचित लाभ लेकर पत्रावलियों के संचालन, तिथियों के निर्धारण, अभिलेखों की उपलब्धता तथा प्रशानिक कार्यों में अनावश्यक विलंब करने के साथ भेदभाव करते है।
पेशकार को वकीलों ने बताया अज्ञानी
वकीलों का आरोप है की पेशकार गंगा प्रशाद मौर्य को अपने पद का ज्ञान नहीं है। वकीलों ने शिकायती पत्र में लिखा है कि उक्त पेशकार ने तमाम वादों में पूर्व में तैनात एसडीएम अंकित कुमार के आर्डर सीटों के बाद में आये तत्कालीन एसडीएम मनोज कुमार के कार्यकाल की फर्देहकाम लिखी है जो सरकार एवं राजस्व परिषद द्वारा पारित आदेशों के बिलकुल विपरीत है। जिसकी जांच करा दोषी पर कार्यवाही की मांग की है।
दबंगई के बल पर करा लेता है सादे आर्डरों पर साइन
वाद संख्या टी202410460105273 चरन सिंह बनाम सुशील कुमार एसडीएम न्यायालय में विचाराधीन है। वकीलों का आरोप है कि इस मुकदमे में पेशकार गंगा प्रसाद मौर्य ने प्रतिवादी की गलत नंबरिंग अंकित कर बिना किसी प्रार्थना पत्र व बिना आदेश के संशोधित कर दिया गाय, जो विधि के विपरीत है। वकीलों का आरोप है कि पेशकार ने पूर्व में अपनी दबंगई के चलते प्रार्थी व अन्य के आर्डर सादे सीट पर हस्ताक्षर करा लेता है, जो बाद में अपने मन माफिक से आर्डर पर लिख लेता है।
लंबी तारीखें देकर मामले को दबाने का करता है काम
एक और गंभीर आरोप लगा है कि पेशकार पत्रावली को दबाये रखने के लिये लंबी तारीखें देता है। एक ऐसे ही मामले का जिक्र वकीलों ने प्रार्थना पत्र में किया है, जो सरकार बनाम राधेश्याम का है। जिसमें सरकार का हित है। लेकिन पेशकार विपक्षीगण से मिल उसे लम्बित रखे हैं। वकीलों का आरोप है कि यह बहुत पुराना वाद है। जिसे पेशकार विपक्षीगण को लाभ पहुंचाने के लिये लंबी-लंबी तारीखें देने के साथ पीठासीन अधिकारी के समक्ष प्रस्तुत नहीं करता है।
रिपोर्ट- सुरेन्द्र कुमार

