दिल्ली में अवैध आधार कार्ड पर LG सख्त, इन-हाउस नामांकन और 15 जुलाई तक केंद्रों की लिस्ट मांगी
Sandesh Wahak Digital Desk: दिल्ली में अवैध रूप से रह रहे लोगों के पास आधार कार्ड जैसे भारतीय पहचान पत्र होने के मामलों पर उपराज्यपाल वीके सक्सेना ने बड़ा कदम उठाया है। शुक्रवार को उपराज्यपाल ने दिल्ली के अधिकारियों को सख्त निर्देश दिए हैं। उन्होंने साफ कहा कि अब आधार नामांकन प्रक्रिया में किसी भी प्रकार की लापरवाही बर्दाश्त नहीं की जाएगी।
मुख्य सचिव को पत्र, ‘इन-हाउस’ मॉडल अपनाएं और केंद्रों की सूची दें
उपराज्यपाल सचिवालय ने दिल्ली के मुख्य सचिव को एक पत्र लिखा है। इसमें उन्होंने आधार कार्ड जारी करने के लिए सख्त नियम लागू करने का अनुरोध किया है। उपराज्यपाल ने नामांकन प्रक्रिया को ‘इन-हाउस मॉडल’ पर करने का निर्देश दिया है। इसके साथ ही, मुख्य सचिव से 15 जुलाई तक दिल्ली के सभी आधार नामांकन केंद्रों की सूची भी मांगी गई है।
पत्र में लिखा गया है कि दिल्ली सरकार के रजिस्ट्रारों की जिम्मेदारियों, खासकर फील्ड स्तर पर इम्प्लीमेंटेशन, मॉनिटरिंग और वेरिफिकेशन प्रक्रियाओं की दोबारा समीक्षा की जरूरत है। उपराज्यपाल ने निर्देश दिया है कि सभी रजिस्ट्रारों को स्पष्ट रूप से निर्देशित किया जाए कि वो आधार (नामांकन और अद्यतन) विनियम, 2016 के प्रावधानों का सख्ती से पालन करें और दो महीने में इन-हाउस मॉडल को अपनाएं।
अवैध आधार कार्ड राष्ट्रीय सुरक्षा के लिए खतरा
पत्र में इस बात पर गंभीर चिंता जताई गई है कि कई मामलों में अवैध रूप से रह रहे लोगों ने गलत दस्तावेजों या तथ्यों को छिपाकर आधार कार्ड हासिल किए हैं। इसका एक दुष्प्रभाव ये है कि ऐसे व्यक्ति बाद में पासपोर्ट और मतदाता पहचान पत्र जैसे दस्तावेज भी हासिल कर लेते हैं, जो नागरिकता को प्रमाणित करते हैं। उपराज्यपाल ने आगे कहा कि ऐसे लोग एक बार आधार कार्ड हासिल करने के बाद केंद्र और राज्य सरकार की तमाम योजनाओं का लाभ उठाते हैं, और नौकरियों में भी प्रवेश पाते हैं, जिससे स्थानीय लोगों के रोजगार पर भी प्रतिकूल असर पड़ता है। पत्र में स्पष्ट रूप से कहा गया है कि ये स्थिति राष्ट्रीय सुरक्षा के लिए भी एक गंभीर चिंता का विषय है।
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