LG वीके सक्सेना को बड़ी राहत, मानहानि केस में कोर्ट ने किया बरी
Sandesh Wahak Digital Desk: दिल्ली के उपराज्यपाल (LG) विनय कुमार सक्सेना के लिए राहत भरी खबर आई है। साकेत मेट्रोपॉलिटन मजिस्ट्रेट कोर्ट ने मेधा पाटकर द्वारा उनके खिलाफ दायर मानहानि के मामले में उन्हें सभी आरोपों से बरी कर दिया है। अदालत ने माना कि उपराज्यपाल के खिलाफ लगाए गए आरोपों को साबित करने के लिए कोई ठोस सबूत मौजूद नहीं हैं।
मामले की सुनवाई करते हुए न्यायिक मजिस्ट्रेट राघव शर्मा ने स्पष्ट किया कि शिकायतकर्ता (मेधा पाटकर) की ओर से ऐसा कोई भी कानूनी रूप से मान्य या पुख्ता सबूत पेश नहीं किया गया, जिससे वीके सक्सेना पर लगे आरोपों की पुष्टि हो सके। सबूतों के अभाव में कोर्ट ने उन्हें ससम्मान बरी करने का फैसला सुनाया।
यह कानूनी विवाद साल 2000 में शुरू हुआ था, जब वीके सक्सेना अहमदाबाद स्थित एनजीओ ‘नेशनल काउंसिल फॉर सिविल लिबर्टीज’ के प्रमुख थे। उस वक्त मेधा पाटकर ने उनके खिलाफ एक मामला दर्ज कराया था। पाटकर का आरोप था कि सक्सेना ने उनके और नर्मदा बचाओ आंदोलन (NBA) के खिलाफ अपमानजनक विज्ञापन प्रकाशित करवाए थे।
जवाब में वीके सक्सेना ने भी मेधा पाटकर के खिलाफ दो केस दर्ज किए थे। उनका आरोप था कि पाटकर ने टीवी इंटरव्यू और प्रेस बयानों के जरिए उनकी छवि खराब करने की कोशिश की है। दिलचस्प बात यह है कि इस कानूनी लड़ाई में पलड़ा दोनों तरफ बराबर रहा है। अभी कुछ दिन पहले ही, यानी 25 जनवरी को, दिल्ली की एक अदालत ने मेधा पाटकर को भी उस मानहानि मामले में बरी कर दिया था, जो वीके सक्सेना ने 2006 में उनके खिलाफ दर्ज कराया था।
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