Lucknow: नगर निगम से विकास कार्यों की 250 फाइलें गायब

मामले में न तो संबंधित लिपिक के खिलाफ हुई कार्रवाई, न लिखवाई गई एफआईआर

Sandesh Wahak Digital Desk : शहर में विकास कार्यों के लिए नगर निगम के जोनल कार्यालयों में फाइलें तैयार की जाती हैं। मगर, नगर निगम मुख्यालय में बड़े अफसरों की स्वीकृति से पूर्व ही यह फाइलें गायब हो जा रही हैं।

यहां तक कि विकास कार्यों संबंधी प्रर्थना पत्र भी नगर निगम में महफूज नहीं हैं। करीब 250 फाइलें गायब होने की गवाही खुद नगर निगम के इंजीनियर दे रहे हैं। जिसके चलते शहर के विभिन्न इलाकों में सडक़, नाली, सीवर, जलनिकासी समेत कई विकास कार्य लटक गए हैं।

अपर नगर आयुक्त को भेजा पत्र हुआ गायब   

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फैजुल्लागंज के जुगुल विहार कालोनी के निवासी संजय द्विवेदी ने बताया कि करीब दो महीने पहले उन्होंने अपर नगर आयुक्त को संबोधित एक प्रर्थना पत्र नगर निगम में दिया था। उनके इलाके में ओमेश्वर मंदिन से ज्ञानेन्द्र द्विवेदी के घर तक मात्र 50 मीटर इटरलॉकिंग टाइल्स से फुटपाथ का निर्माण किया जाना था। आरोप है कि नगर निगम जोन-3 के इंजीनियरों को उनका पत्र खोजे नहीं मिल रहा है, न ही उनकी फाइल मुख्यालय पहुंची है। जबकि नगर आयुक्त ने कार्य किए जाने के लिए संबंधित अफसरों को निर्देशित कर रखा है।

उधर, जोन-तीन के जूनियर इंजीनियर सनी विश्वकर्मा ने बताया कि उनके स्तर से मुख्यालय में स्वीकृति के लिए फाइलें भेजी जाती हैं। अभी तक करीब 250 फाइलें गायब हो चुकीं हैं। संजय द्विवेदी का पत्र भी नहीं मिल रहा है। बता दें कि नगर निगम में एक के बाद एक लगातार फाइलों के गायब होने का सिलसिला जारी है। लेकिन इस मामले में अभी तक न तो संबंधित लिपिक के खिलाफ कार्रवाई की गई और न ही जूनि

यर इंजीनियर (जेई) की ओर से कोई एफआईआर दर्ज कराई गई है। ऐसे में नगर निगम की यह कार्यप्रणाली सवालों के घेरे मे है। इस संबंध में अफसरों को कई बार फोन किया गया लेकिन उनसे संपर्क नहीं हो सका।

ठेकेदार लेकर घूमते है फाइलें

नगर निगम में अफसर-कर्मचारियों के अलावा किसी को भी सरकारी फाइल रखने की अनुमति नहीं है। बावजूद इसके नगर निगम के जोनल कार्यालयों से लेकर मुख्यालय में तमाम ठेकेदार रोजाना फाइलें हाथ में लिये घूमते देखे जा सकते हैं। नगर निगम के इंजीनियरों और ठेकेदारों की मिलीभगत के कारण ही यह खेल नगर निगम में चल रहा है। ऐसे में फाइलें गुम होने की संभावना सबसे ज्यादा रहती है। जबकि नियम है कि सभी फाइलें और प्रर्थना पत्र डिस्पैच रजिस्टर में दर्ज होकर एक पटल से दूसरी पटल पर भेजे जाएं।

नहीं छूट रहा मलाईदार कुर्सी का मोह

नगर निगम जोन-तीन व सात के नगर अभियंता का कार्य संभाल रहे पुनीत ओझा का तबादला पिछले महीने बरेली नगर निगम में हो चुका है। जहां उन्हें मुख्य अभियंता के पद के लिए शासन ने ट्रांसफर किया है। चूकि लखनऊ की अपेक्षा बरेली नगर निगम काफी छोटा व कम बजट वाला है। ऐसे में राजधानी लखनऊ के दो मलाईदार जोनों का मोह पुनीत ओझा से नहीं छूट रहा है। नगर निगम के अफसरों की कमीशनखोरी का ही यह नतीजा है कि शहर के विकास कार्यों की आड़ में पुनीत ओझा को कार्यमुक्त नहीं किया जा रहा है। सूत्रों के मुताबिक इस खेल के पीछे नगर निगम का एक कमीशनखोर अफसर शामिल है।

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