लखनऊ: गैंगरेप के एक सप्ताह बाद भी ‘प्रधानपति’ फरार, रहीमाबाद पुलिस की भूमिका पर उठे सवाल

Sandesh Wahak Digital Desk: राजधानी लखनऊ के रहीमाबाद थाना क्षेत्र में एक महिला के साथ हुए सामूहिक दुष्कर्म (गैंगरेप) के मामले में पुलिस की शिथिलता चर्चा का विषय बनी हुई है। मुकदमे के एक सप्ताह बीत जाने के बाद भी नामजद आरोपी, ग्राम पंचायत जमोलिया का प्रधानपति मुश्ताक और उसका साथी सुनील, पुलिस की पकड़ से बाहर हैं।

मामले का विवरण: ब्लैकमेलिंग और 5 माह का गर्भ

पीड़िता द्वारा दर्ज कराई गई प्राथमिकी के अनुसार, यह मामला धोखे और शोषण की एक लंबी कड़ी है। आरोपी सुनील ने एक वाटरपार्क में काम करने के दौरान महिला को प्रेमजाल में फंसाया और जंगल में ले जाकर दुष्कर्म किया। इस दौरान उसने पीड़िता के अश्लील वीडियो और फोटो बना लिए।

आरोपी सुनील ने पीड़िता को ब्लैकमेल कर जमोलिया के प्रधानपति मुश्ताक के घर ले जाकर उसके जेवर और 40 हजार रुपये नकदी छीन लिए। इसके बाद दोनों आरोपियों ने महिला के साथ बार-बार सामूहिक दुष्कर्म किया। लगातार शोषण के कारण महिला 5 माह की गर्भवती हो गई है। आरोपियों ने उस पर गर्भपात कराने का दबाव बनाया, लेकिन पीड़िता ने इनकार करते हुए आरोपियों के DNA टेस्ट कराने की मांग की है।

आरोपी मुश्ताक: पुराना आपराधिक इतिहास

जमोलिया का प्रधानपति मुश्ताक इलाके का हिस्ट्रीशीटर बताया जा रहा है। उसके विरुद्ध पूर्व में भी कई गंभीर मामले दर्ज हैं। मजरा लोधई की एक महिला ने उस पर छेड़छाड़, मारपीट और दलित उत्पीड़न (SC/ST एक्ट) का मुकदमा दर्ज कराया था।  इसके अलावा, दो अन्य ग्रामीणों ने भी मुश्ताक के खिलाफ मारपीट और एससी-एसटी एक्ट के तहत मामले दर्ज कराए हैं।

पुलिस की कार्यशैली पर गंभीर आरोप

गंभीर धाराओं (गैंगरेप, ब्लैकमेलिंग, मारपीट) में मुकदमा पंजीकृत होने के बावजूद पुलिस की खाली हाथ बैठने की नीति पर सवाल खड़े हो रहे हैं। स्थानीय सूत्रों और पीड़िता के पक्ष का आरोप है कि पुलिस और रसूखदार प्रधानपति के बीच ‘सेटिंग’ के चलते गिरफ्तारी नहीं की जा रही है। एक सप्ताह बीतने के बाद भी आरोपियों का खुला घूमना पुलिस प्रशासन की विश्वसनीयता पर प्रश्नचिह्न लगा रहा है।

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