लखनऊ पुस्तक मेला में बोले उच्च शिक्षा मंत्री, विश्वविद्यालय डिग्री देते हैं, लेकिन सर्वांगीण ज्ञान सिर्फ पुस्तकें देती हैं

Lucknow News: चारबाग के रवीन्द्रालय में आयोजित लखनऊ पुस्तक मेले का माहौल उस समय और भी गरिमामय हो गया जब प्रदेश के उच्च शिक्षा मंत्री योगेन्द्र उपाध्याय ने मुख्य अतिथि के रूप में शिरकत की। दीप प्रज्वलन के बाद उन्होंने मेले का भ्रमण किया और किताबों को समाज की अनमोल धरोहर बताया।

समारोह को संबोधित करते हुए योगेन्द्र उपाध्याय ने एक बड़ी बात कही। उन्होंने जोर देकर कहा कि विश्वविद्यालय और कॉलेज किसी विशेष विषय में शिक्षा तो दे सकते हैं, लेकिन एक व्यक्ति के सर्वांगीण विकास और व्यापक ज्ञान के लिए पुस्तकों का गहरा अध्ययन अनिवार्य है। उन्होंने छात्रों से अपील की कि वे केवल सिलेबस तक सीमित न रहें, बल्कि मेले में आकर विभिन्न विषयों की किताबों से अपना ज्ञान बढ़ाएं।

लखनऊ पुस्तक मेला में बोले उच्च शिक्षा मंत्री, विश्वविद्यालय डिग्री देते हैं, लेकिन सर्वांगीण ज्ञान सिर्फ पुस्तकें देती हैं

मोबाइल के दौर में किताबों की चुनौती

आज के डिजिटल युग पर कटाक्ष करते हुए मंत्री ने कहा, किसी भी भाषा और समाज का गौरव उसके साहित्य से ही तय होता है। पुस्तकें ज्ञान का वह संचित भंडार हैं जो समाज को संस्कार और सही दिशा प्रदान करती हैं। उन्होंने माना कि आज तकनीक और मोबाइल का उपयोग बढ़ रहा है, लेकिन भारतीय संस्कृति, जीवन मूल्यों और परंपराओं को गहराई से समझने के लिए पुस्तकों के अध्ययन की परंपरा को जीवित रखना बहुत जरूरी है।

लखनऊ पुस्तक मेला में बोले उच्च शिक्षा मंत्री, विश्वविद्यालय डिग्री देते हैं, लेकिन सर्वांगीण ज्ञान सिर्फ पुस्तकें देती हैं

साहित्य में सुरक्षित है वसुधैव कुटुंबकम्

योगेन्द्र उपाध्याय ने भारतीय संस्कृति के मूल मंत्र वसुधैव कुटुंबकम् (पूरी दुनिया एक परिवार है) का जिक्र करते हुए कहा कि इस सिद्धांत को केवल साहित्य ही जीवित रख सकता है। उन्होंने लखनऊ पुस्तक मेले के आयोजकों की सराहना करते हुए कहा कि ऐसे आयोजन पढ़ने की संस्कृति को बढ़ावा देने के साथ-साथ समाज में सकारात्मक चिंतन पैदा करते हैं।

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