Lucknow News: भारतीय जूडो को नई ऊंचाइयों तक पहुंचाने वालीं कोच सुषमा अवस्थी को किया गया सम्मानित
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Sandesh Wahak Digital Desk: भारतीय जूडो को नई ऊंचाइयों तक पहुंचाने में अहम भूमिका निभाने वाली वरिष्ठ राष्ट्रीय जूडो कोच सुषमा अवस्थी को उनके उत्कृष्ट प्रशिक्षण, अंतरराष्ट्रीय अनुभव और पदक विजेता योगदान के लिए सम्मानित किया गया।
यह सम्मान समारोह हजरतगंज (लखनऊ) स्थित पैरा जूडो अकादमी में गरिमामय वातावरण में आयोजित हुआ, जिसमें खेल जगत की कई प्रतिष्ठित हस्तियों और जूडो खिलाड़ियों की उपस्थिति रही।
समारोह में मुनव्वर अंजार (महासचिव, भारतीय पैरा जूडो एसोसिएशन), अंतरराष्ट्रीय जूडो खिलाड़ी प्रकाश चंद्र, राजेंद्र शर्मा सहित अनेक वरिष्ठ खिलाड़ी, प्रशिक्षक और खेल प्रेमी मौजूद रहे।
सुषमा अवस्थी वर्तमान में भारतीय खेल प्राधिकरण (SAI) में मुख्य कोच के रूप में सेवाएं दे रही हैं। उन्होंने एसटीसी (STC), खेलो इंडिया और नेशनल सेंटर ऑफ एक्सीलेंस (NCoE) के खिलाड़ियों को उच्च स्तरीय प्रशिक्षण प्रदान किया है।
उनके मार्गदर्शन में कई युवा जूडो खिलाड़ियों ने राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर शानदार प्रदर्शन कर देश का नाम रोशन किया है।
उल्लेखनीय है कि सुषमा अवस्थी ने क्यूबा और उज़्बेकिस्तान जैसे जूडो के वैश्विक पावरहाउस देशों में एडवांस हाई-परफॉर्मेंस कोचिंग ट्रेनिंग प्राप्त की है। इस अंतरराष्ट्रीय अनुभव का लाभ उन्होंने भारतीय खिलाड़ियों तक पहुंचाया, जिससे तकनीक, रणनीति और फिटनेस के स्तर में उल्लेखनीय सुधार देखने को मिला।
वे कई वर्षों तक भारतीय सीनियर जूडो टीम की कोच भी रह चुकी हैं। उनके नेतृत्व में भारतीय टीम ने कॉमनवेल्थ जूडो चैंपियनशिप, एशियन जूडो चैंपियनशिप समेत कई अंतरराष्ट्रीय प्रतियोगिताओं में पदक हासिल किए। इसके साथ ही विभिन्न अंतरराष्ट्रीय दौरों के दौरान भारतीय खिलाड़ियों ने वैश्विक मंच पर सशक्त पहचान बनाई।
खेल प्रशासन के क्षेत्र में भी सुषमा अवस्थी का योगदान उल्लेखनीय रहा है। उन्होंने अस्मिता खेलो इंडिया महिला लीग, राष्ट्रीय और जोनल जूडो चैंपियनशिप जैसे आयोजनों को सफलतापूर्वक संपन्न कराया, जिससे महिला खिलाड़ियों को आगे बढ़ने के लिए मजबूत मंच मिला।
सम्मान समारोह में मुनव्वर अंजार ने सुषमा अवस्थी के योगदान की सराहना करते हुए कहा कि उनके जैसे समर्पित कोच न केवल उत्कृष्ट खिलाड़ी तैयार करते हैं, बल्कि देश में खेल संस्कृति को भी सशक्त बनाते हैं।
यह सम्मान उनके वर्षों के समर्पण, अनुशासन और राष्ट्र के प्रति सेवा भावना का प्रतीक है, जो आने वाली पीढ़ियों के जूडो खिलाड़ियों के लिए प्रेरणास्रोत बना रहेगा।
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