Lucknow News: IVF से आगे बढ़ी फर्टिलिटी चिकित्सा, AI और रोबोटिक सर्जरी से इलाज में नए विकल्प
Lucknow News: फर्टिलिटी और प्रजनन चिकित्सा का दायरा अब केवल आईवीएफ तक सीमित नहीं है।
आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI), रोबोटिक सर्जरी, आधुनिक गर्भावस्था निगरानी और मरीज की जरूरत के अनुसार उपचार जैसी तकनीकों से इस क्षेत्र में नए विकल्प सामने आ रहे हैं।
विशेषज्ञों के मुताबिक, इन तकनीकों का उद्देश्य डॉक्टरों का विकल्प बनना नहीं, बल्कि जांच, उपचार की योजना और चिकित्सकीय निर्णय को अधिक सटीक बनाने में मदद करना है।
लखनऊ में आयोजित HOPE CME 2026 में देश के विभिन्न हिस्सों से आए विशेषज्ञों ने प्रजनन चिकित्सा, स्त्री रोग और महिला स्वास्थ्य में हो रहे तकनीकी बदलावों पर चर्चा की।
कार्यक्रम का आयोजन अजंता हॉस्पिटल एंड IVF सेंटर की निदेशक डॉ. गीता खन्ना के नेतृत्व में किया गया।
कार्यक्रम में पद्मश्री प्रो. (डॉ.) सोनिया नित्यानंद, KGMU की कुलपति, विधायक डॉ. नीरज बोरा, पूर्व निदेशक प्रो. दीपक मालवीय और लखनऊ के मुख्य चिकित्सा अधिकारी डॉ. एनबी सिंह समेत चिकित्सा क्षेत्र के कई विशेषज्ञ और अतिथि मौजूद रहे।
AI से जांच और उपचार में मदद
विशेषज्ञों ने बताया कि AI का इस्तेमाल मेडिकल डेटा के विश्लेषण, बीमारी की पहचान में सहायता, उपचार की योजना और मरीज की निगरानी में किया जा सकता है।
फर्टिलिटी उपचार में दवाओं की प्रतिक्रिया, भ्रूण और गर्भस्थ शिशु की निगरानी तथा PCOS के प्रबंधन में भी AI की संभावित भूमिका पर चर्चा हुई।
विशेषज्ञों ने कहा कि AI से मिली जानकारी को मरीज की व्यक्तिगत स्थिति और डॉक्टर के चिकित्सकीय अनुभव के साथ मिलाकर ही उपचार का निर्णय लेना चाहिए।

वहीं, रोबोटिक सर्जरी जटिल स्त्री रोग संबंधी प्रक्रियाओं में बेहतर दृश्यता और सटीकता उपलब्ध कराने में मदद कर सकती है।
IVF और बार-बार गर्भपात पर मंथन
सम्मेलन में IVF की सफलता को प्रभावित करने वाले कारकों, बार-बार IVF असफल होने और बार-बार गर्भपात के संभावित कारणों पर भी चर्चा हुई।
विशेषज्ञों ने कहा कि किसी एक जांच की रिपोर्ट के आधार पर उपचार तय करने के बजाय मरीज की उम्र, मेडिकल हिस्ट्री, प्रजनन संबंधी स्थिति और अन्य जांचों को ध्यान में रखना जरूरी है।
PCOS का असर सिर्फ फर्टिलिटी तक नहीं
विशेषज्ञों ने बताया कि PCOS को केवल गर्भधारण में परेशानी से जोड़कर देखना पर्याप्त नहीं है। इसका असर महिलाओं के दीर्घकालिक स्वास्थ्य पर भी पड़ सकता है। इसलिए इसके उपचार में प्रजनन क्षमता के साथ वजन, हार्मोनल स्थिति, चयापचय संबंधी जोखिम और समग्र स्वास्थ्य पर भी ध्यान देना जरूरी है।
सम्मेलन में मेनोपॉज के दौरान महिलाओं की देखभाल, कैंसर की रोकथाम और शुरुआती पहचान, गर्भावस्था की निगरानी तथा आधुनिक चिकित्सा उपकरणों के इस्तेमाल पर भी चर्चा हुई।
हर मरीज के लिए अलग हो उपचार
विशेषज्ञों ने कहा कि फर्टिलिटी उपचार में एक ही तरीका हर मरीज के लिए उपयुक्त नहीं हो सकता।
संतान प्राप्ति में परेशानी होने पर पति-पत्नी दोनों का चिकित्सकीय मूल्यांकन, जरूरी जांच, जीवनशैली में सुधार और जरूरत के अनुसार दवा या सर्जरी पर विचार किया जाना चाहिए।
कुछ मामलों में IVF की जरूरत हो सकती है, जबकि अन्य मरीजों के लिए दूसरी उपचार पद्धति अधिक उपयुक्त हो सकती है।
HOPE CME 2026 में विशेषज्ञों ने जोर दिया कि आधुनिक तकनीक चिकित्सा विशेषज्ञता का विकल्प नहीं, बल्कि उसे अधिक प्रभावी बनाने का माध्यम है।
बेहतर फर्टिलिटी उपचार के लिए तकनीकी प्रगति के साथ सही निदान, चिकित्सकीय अनुभव, मरीज की व्यक्तिगत जरूरत और निरंतर देखभाल जरूरी है।
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