Lucknow : 83 अवैध अपार्टमेंटों के खिलाफ LDA की सख्ती, नपाई के बाद शुरू होगी तोड़फोड़, नोटिस जारी
Sandesh Wahak Digital Desk: राजधानी में बने 83 अवैध अपार्टमेंटों को गिराने की प्रक्रिया में लखनऊ विकास प्राधिकरण (एलडीए) ने तेजी ला दी है। एलडीए द्वारा करीब एक सप्ताह पहले जारी किए गए नोटिस के बाद अब इन अपार्टमेंटों की नपाई का कार्य शुरू हो गया है। बुधवार को न्यू हैदराबाद की कालाकांकर कॉलोनी सहित शहर के अन्य कई अपार्टमेंटों की नपाई की गई। इस नपाई के माध्यम से यह सुनिश्चित किया जा रहा है कि कितना निर्माण अवैध है और उसे ध्वस्त करने की आवश्यकता है।
एलडीए के अनुसार, ये 83 अवैध अपार्टमेंट शहर के विभिन्न इलाकों में बने हुए हैं और इनके मानचित्र प्राधिकरण से स्वीकृत नहीं हैं। इनमें से कुछ मामलों में ध्वस्तीकरण आदेश 2002, 2010 और 2012 में जारी हो चुके थे, लेकिन उस समय कोई कार्रवाई नहीं की गई। एलडीए ने 2014 में इन अपार्टमेंटों को चिह्नित किया था, लेकिन तब भी ध्वस्तीकरण की कार्रवाई नहीं हो सकी। अब हाईकोर्ट में मामले की सुनवाई शुरू होने के बाद एलडीए हरकत में आया है और कार्रवाई शुरू की गई है।
15 दिन का नोटिस जारी
एलडीए ने अवैध रूप से निर्मित इन अपार्टमेंटों के निवासियों को कब्जा खाली करने के लिए 15 दिन का समय दिया है। यह नोटिस अलग-अलग तारीखों में जारी किए गए हैं, जिनमें से कुछ का समयसीमा 11 फरवरी को समाप्त हो रही है, जबकि कुछ के लिए यह समय सीमा आगे की तारीखों तक है।
अयोध्या रोड स्थित सिल्वर लाइन अपार्टमेंट की रेजीडेंट वेलफेयर सोसाइटी के अध्यक्ष प्रमोद अग्रहरि ने बताया कि एलडीए द्वारा जारी ध्वस्तीकरण नोटिस के खिलाफ बिल्डर ने कोर्ट में वाद दायर किया है। बुधवार को इस मामले पर सुनवाई हुई, और फ्लैट खरीदारों को हाईकोर्ट से राहत मिलने की उम्मीद जताई जा रही है। उन्होंने दावा किया कि उनका अपार्टमेंट सभी नियमों के तहत बना है।
एलडीए का बयान
एलडीए के एसडीएम और जोनल अधिकारी शशि भूषण पाठक ने बताया कि जिन अपार्टमेंटों को अवैध घोषित कर ध्वस्तीकरण के नोटिस जारी किए गए हैं, उनमें विधिवत रूप से नपाई कराई जा रही है। इससे यह स्पष्ट होगा कि कितना निर्माण अवैध है और उसे गिराने की आवश्यकता है। लखनऊ विकास प्राधिकरण की इस कार्रवाई को लेकर शहर में विभिन्न प्रतिक्रियाएं देखने को मिल रही हैं। फ्लैट खरीदारों को उम्मीद है कि उन्हें राहत मिलेगी, जबकि प्रशासन की सख्ती यह दर्शाती है कि भविष्य में अवैध निर्माणों पर अंकुश लगाया जाएगा।
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