हादसे के बाद हरकत में आया लखनऊ नगर निगम, बड़े स्तर पर नालों को ढकने का अभियान शुरू

Sandesh Wahak Digital Desk: ठाकुरगंज में खुले नाले में गिरकर एक युवक की मौत ने लखनऊ नगर निगम को आखिरकार नींद से जगा दिया है। इस दर्दनाक हादसे और उसके बाद मचे राजनीतिक घमासान के बीच अब नगर निगम और जलकल विभाग युद्ध स्तर पर शहर की जर्जर होती व्यवस्था को दुरुस्त करने में जुट गए हैं।

90 से अधिक स्थानों पर खुले नालों को ढका गया, 30 से ज्यादा सीवर ढक्कन बदले गए

बरसात के मौसम में बढ़ते खतरे को देखते हुए नगर आयुक्त गौरव कुमार के निर्देश पर लखनऊ नगर निगम ने सभी जोनों में खुले मैनहोल और नालों को ढकने का विशेष अभियान शुरू किया है। मुख्य अभियंता (सिविल) महेश वर्मा ने बताया कि अब तक 90 से अधिक जगहों पर खुले नालों को कवर किया गया है, वहीं जलकल विभाग ने 30 से ज्यादा जगहों पर टूटी या गायब सीवर ढक्कनों को बदला है।

ठाकुरगंज हादसे ने झकझोर दी व्यवस्था 

शनिवार को ठाकुरगंज के राधाग्राम इलाके में सुरेश लोधी (43) की खुले सीवर स्लैब में गिरने से मौत हो गई थी। स्थानीय पार्षद बीसी सिंह का दावा है कि उन्होंने पहले ही उस स्थान की मरम्मत के लिए कई बार लिखित अनुरोध किया था, लेकिन कोई कार्रवाई नहीं हुई। इसके बावजूद हादसे के बाद नगर आयुक्त के निर्देश पर बीसी सिंह और एक वेंडर के खिलाफ FIR दर्ज कर दी गई, जिससे नगर निगम के भीतर भूचाल आ गया।

भाजपा पार्षदों का उग्र प्रदर्शन, कांग्रेस ने भी साधा निशाना 

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भाजपा पार्षदों का प्रदर्शन

FIR के विरोध में भाजपा पार्षदों ने नगर निगम मुख्यालय में मंगलवार को जमकर प्रदर्शन किया। उन्होंने नगर आयुक्त पर “गलती छिपाने और पार्षद को बलि का बकरा बनाने” का आरोप लगाया। उधर कांग्रेस प्रदेश अध्यक्ष अजय राय ने मृतक के परिजनों से मुलाकात की और निष्पक्ष जांच, मुआवजा और दोषियों पर कार्रवाई की मांग की।

शहरभर से मिल रही शिकायतें, जनता डरी-सहमी

ठाकुरगंज की घटना के बाद लखनऊ के कई इलाकों -जैसे राजाजीपुरम, इंदिरा नगर, आशियाना, चौक, अमीनाबाद आदि – से गड्ढों और टूटे सीवर ढक्कनों की शिकायतें सामने आ रही हैं। सोशल मीडिया पर लोग सड़कें और नालियों की तस्वीरें साझा कर रहे हैं, जिनमें साफ देखा जा सकता है कि किस कदर शहर खतरे में है।

नगर निगम का दावा: अब कोई ढिलाई नहीं

नगर आयुक्त गौरव कुमार ने कहा है कि यह अभियान तब तक जारी रहेगा जब तक शहर के सभी चिन्हित खतरे पूरी तरह सुरक्षित नहीं हो जाते। सभी अपर नगर आयुक्तों को अपने क्षेत्रों में निरीक्षण कर त्वरित कार्रवाई के निर्देश दिए गए हैं। साथ ही नागरिकों से अपील की गई है कि अगर वे किसी इलाके में खुला मैनहोल या टूटा ढक्कन देखें, तो तुरंत नगर निगम या जलकल को सूचित करें। अब सवाल ये है कि क्या सिर्फ हादसे के बाद की गई ‘सफाई मुहिम’ ही काफी है? या फिर लखनऊ की सड़कों और सीवर सिस्टम को स्थायी समाधान की जरूरत है?

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