लखनऊ नगर निगम का बड़ा एक्शन, बस्तौली में 7 करोड़ की सरकारी जमीन से हटा अवैध कब्जा

Sandesh Wahak Digital Desk: उत्तर प्रदेश की राजधानी लखनऊ में सरकारी संपत्तियों को सुरक्षित करने के लिए नगर निगम का ‘एंटी-अतिक्रमण’ अभियान पूरी रफ्तार से चल रहा है। इसी कड़ी में सोमवार को तहसील सदर के ग्राम बस्तौली में नगर निगम की टीम ने भारी पुलिस बल की मौजूदगी में छापेमारी की और करोड़ों रुपये की बेशकीमती शासकीय भूमि को अतिक्रमण मुक्त कराया।

कब्रिस्तान की जमीन पर चल रही थी अवैध प्लॉटिंग

पूरा मामला ग्राम बस्तौली की गाटा संख्या-99 से जुड़ा है। राजस्व अभिलेखों के अनुसार, 0.177 हेक्टेयर का यह बड़ा भूखंड ‘कब्रिस्तान’ के रूप में दर्ज है और कानूनी तौर पर नगर निगम के अधीन शासकीय संपत्ति है।

पिछले कुछ समय से नगर निगम को शिकायतें मिल रही थीं कि कुछ रसूखदार व्यक्तियों और अवैध प्रॉपर्टी डीलरों द्वारा इस सार्वजनिक भूमि पर कब्जा किया जा रहा है। जांच में पाया गया कि भू-माफियाओं ने न केवल यहां पक्की बाउंड्रीवाल खड़ी कर ली थी, बल्कि जमीन का स्वरूप बदलकर यहाँ व्यावसायिक उपयोग के लिए अवैध प्लॉटिंग की तैयारी भी शुरू कर दी गई थी।

संयुक्त टीम ने चलाया ‘पीला पंजा’

नगर आयुक्त गौरव कुमार और अपर नगर आयुक्त पंकज श्रीवास्तव के स्पष्ट निर्देशों के बाद सोमवार को एक संयुक्त प्रवर्तन दल का गठन किया गया। सहायक नगर आयुक्त (सम्पत्ति) रामेश्वर प्रसाद और तहसीलदार नगर निगम अरविन्द पाण्डेय की निगरानी में टीम मौके पर पहुंची।

जैसे ही नगर निगम का दस्ता जेसीबी (JCB) मशीनों के साथ बस्तौली पहुंचा, वहां हड़कंप मच गया। नायब तहसीलदार राजेन्द्र कुमार के नेतृत्व में टीम ने अवैध निर्माण को चिह्नित किया और देखते ही देखते अवैध बाउंड्रीवाल और अन्य अस्थाई ढांचों को जमींदोज कर दिया।

7 करोड़ की जमीन, पुलिस का कड़ा पहरा

नगर निगम के अधिकारियों के अनुसार, इस अभियान में लगभग 0.100 हेक्टेयर जमीन को पूरी तरह मुक्त करा लिया गया है। शहर के विस्तार को देखते हुए इस जमीन की वर्तमान बाज़ार दर करीब 7 करोड़ रुपये आंकी गई है।

कार्रवाई के दौरान किसी भी विरोध की स्थिति से निपटने के लिए थाना गाजीपुर से भारी पुलिस बल बुलाया गया था। साथ ही, नगर निगम के प्रवर्तन दल (ETF) के जवानों ने चारों तरफ से घेराबंदी कर रखी थी, जिससे पूरी प्रक्रिया शांतिपूर्ण ढंग से संपन्न हुई। मौके पर लेखपाल विनोद कुमार वर्मा, कविता तिवारी और संजू मौर्या ने पैमाइश कर जमीन को पुनः निगम के कब्जे में दर्ज किया।

नगर आयुक्त की चेतावनी: “जारी रहेगा अभियान”

नगर आयुक्त गौरव कुमार ने इस कार्रवाई के बाद कड़ा संदेश देते हुए कहा कि सार्वजनिक उपयोग की भूमि और शासकीय संपत्तियों पर किसी भी तरह का अतिक्रमण बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। उन्होंने स्पष्ट किया कि शहर के अन्य हिस्सों में भी सरकारी जमीनों को चिह्नित किया जा चुका है और आने वाले दिनों में ऐसी ही बड़ी कार्रवाई अन्य वार्डों में भी देखने को मिलेगी।

निगम ने आम जनता से भी अपील की है कि किसी भी जमीन को खरीदने से पहले उसके राजस्व रिकॉर्ड की जांच जरूर कर लें, ताकि वे भू-माफियाओं के जाल में फंसकर अपनी मेहनत की कमाई न गंवाएं।

मुख्य आंकड़े

स्थान: ग्राम बस्तौली, गाटा संख्या-99, तहसील सदर, लखनऊ।

मुक्त कराई गई भूमि: 0.100 हेक्टेयर (कुल 0.177 हेक्टेयर में से)।

जमीन का सरकारी स्वरूप: राजस्व अभिलेखों में ‘कब्रिस्तान’ (नगर निगम अधीन)।

अनुमानित बाजार मूल्य: लगभग ₹7 करोड़।

प्रशासनिक टीम: नायब तहसीलदार राजेंद्र कुमार, सहायक नगर आयुक्त रामेश्वर प्रसाद व अन्य।

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