Lucknow News: ऊर्जा मंत्री A.K. शर्मा का बड़ा आरोप, कुछ ‘बिजली कर्मचारी’ नहीं, ‘अराजक तत्व’ हैं

Sandesh Wahak Digital Desk: उत्तर प्रदेश के ऊर्जा मंत्री श्री ए.के. शर्मा को लेकर हाल ही में कुछ संगठनों और कथित कर्मचारी नेताओं ने जो माहौल बनाने की कोशिश की, वह अब सवालों के घेरे में है। मंत्रालय से जुड़े सूत्रों का कहना है कि इन विरोध प्रदर्शनों के पीछे कुछ ऐसे चेहरे हैं, जो खुद को विद्युत कर्मचारी बताकर विभाग की छवि को नुकसान पहुंचा रहे हैं।

बताया जा रहा है कि कुछ कर्मचारी नेताओं को सबसे बड़ी परेशानी इस बात से है कि ऊर्जा मंत्री ए.के. शर्मा किसी के दबाव में नहीं आते। ऐसे में लंबे समय से वे परेशान हैं, क्योंकि अब मंत्रालय में गुटबाजी और सिफारिशों का दौर खत्म होता दिख रहा है।

हड़तालों का इतिहास और हाईकोर्ट का दखल

ए.के. शर्मा के तीन साल के कार्यकाल में इन संगठनों ने अब तक चार बार हड़ताल की है। पहली हड़ताल तो तब करने की कोशिश की गई थी, जब शर्मा जी ने मंत्रालय की जिम्मेदारी संभाली ही थी। हद तो तब हो गई जब हाईकोर्ट को खुद दखल देना पड़ा और इन बार-बार की गई हड़तालों की श्रृंखला को ‘बाहरी प्रेरणा’ से प्रेरित बताया गया।

निजीकरण पर सवाल उठाने वालों से ही सवाल

निजीकरण का विरोध करने वालों से अब सवाल पूछे जा रहे हैं कि—

  1. 2010 में आगरा का निजीकरण हुआ था, तब यूनियन नेता क्या कर रहे थे? तब विरोध क्यों नहीं हुआ?

  2. जब ऊर्जा मंत्री खुद JE तक का ट्रांसफर नहीं करते, तो निजीकरण जैसा बड़ा फैसला वे अकेले कैसे ले सकते हैं?

  3. निजीकरण की पूरी प्रक्रिया मुख्य सचिव की अध्यक्षता में बनी टास्क फोर्स के तहत हो रही है, न कि मंत्री के निजी फैसले से।

  4. सरकार की उच्चस्तरीय अनुमति और विधिवत शासनादेश के तहत ही यह प्रक्रिया आगे बढ़ रही है।

ऊर्जा मंत्री के घर पर अभद्रता, फिर भी शालीनता

कुछ दिन पहले विरोध प्रदर्शन के नाम पर मंत्री के सरकारी आवास पर अराजकता फैलाने का आरोप भी सामने आया है। बताया जा रहा है कि प्रदर्शनकारियों ने निजीकरण के विरोध में मंत्री और उनके परिवार के खिलाफ अशोभनीय भाषा का प्रयोग किया, लेकिन इसके बावजूद ए.के. शर्मा ने सभी को मिठाई खिलाई, पानी पिलाया और ढाई घंटे तक मुलाकात के लिए प्रतीक्षा भी की। यह घटना उनकी संयमित और जनसेवाभावी सोच को दर्शाती है।

जनता और ईश्वर उनके साथ

जिस तरह से कुछ गिने-चुने चेहरे निजी स्वार्थ और ‘सुपारी एजेंडे’ के तहत पूरे विभाग और मंत्री की छवि को नुकसान पहुंचाने की कोशिश कर रहे हैं, उसे लेकर अब जनता भी सवाल करने लगी है।

ए.के. शर्मा की छवि एक ईमानदार, कर्मठ और जवाबदेह मंत्री की रही है। वे जनता को बेहतर बिजली व्यवस्था देने और व्यवस्था में पारदर्शिता लाने के लिए लगातार प्रयासरत हैं।

“जाको राखे साइयाँ, मार सके ना कोय…”
शायद यही वजह है कि तमाम झंझावतों के बीच भी वे डटे हुए हैं और जनता का विश्वास उनके साथ है।

Also Read: केरल सरकार का बड़ा कदम, राष्ट्रपति द्वारा…

\

Get real time updates directly on you device, subscribe now.