VIDEO: ‘विधायक का करीबी हूं, 17 करोड़ दे दो वरना परिवार का सफाया कर दूंगा…’
Sandesh Wahak Digital Desk: उत्तर प्रदेश की राजधानी लखनऊ में 17 करोड़ रुपये की रंगदारी मांगने का एक सनसनीखेज मामला सामने आया है।
आरोपित माजिन खान पर एक व्यक्ति को जान से मारने की धमकी देने और खुद को विधायक से जुड़ा हुआ बताने का आरोप है। मामले में पुलिस ने केस दर्ज कर जांच शुरू कर दी है, जबकि घटना से संबंधित वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल हो चुका है।
क्या है पूरा मामला?
पीड़ित शीबू (जो राणा प्रताप मार्ग स्थित 3-A क्रिएशन स्क्वायर भवन का मैनेजर है) ने हजरतगंज थाने में दी गई तहरीर में बताया कि 1 अगस्त की सुबह करीब 4:30 बजे, माजिन खान अपने 3-4 साथियों के साथ सफेद कार में पहुंचा और भवन परिसर में मौजूद गार्ड से गाली-गलौज और धमकी देने लगा।
माजिन खान ने कथित रूप से कहा कि यदि भवन मालिक नियाज अहमद 17 करोड़ रुपये नहीं देते, तो वह उनके पूरे परिवार का सफाया कर देगा और बिल्डिंग को भी गिरवा देगा। इसके साथ ही उसने यह भी दावा किया कि वह एक विधायक का करीबी है।
वायरल वीडियो में माजिन की धमकी
सोशल मीडिया पर वायरल वीडियो में माजिन खान गार्ड से कहता नजर आ रहा है:
“नियाज से कह देना माजिन भाई आए थे… 17 करोड़ रुपये दे दो, वरना यहां से लेकर जेल भिजवा देंगे। मेरे बाप के पेंशन के पैसे हैं… अगर नहीं दिए तो बिल्डिंग को पूरी तरह गिरवा देंगे। विधायक जी भी आए थे।”
वीडियो में उसकी धमकी स्पष्ट रूप से सुनी जा सकती है, जिससे आम लोगों और क्षेत्रीय प्रशासन में हड़कंप मच गया है।
पुलिस ने दर्ज किया केस
हजरतगंज थाना पुलिस ने शीबू की तहरीर पर माजिन खान और उसके साथ मौजूद 3-4 अज्ञात आरोपियों के खिलाफ भारतीय न्याय संहिता (BNS) की धारा 352 (मारपीट की धमकी), 351(3) (जान से मारने की धमकी) और 308(2) (गंभीर हमले की आशंका) के तहत एफआईआर दर्ज कर ली है। मामले की जांच जारी है।
गौरतलब है कि माजिन खान चौक क्षेत्र का निवासी है और उसे हाल ही में चौक पुलिस ने अवैध असलहा लहराने के आरोप में गिरफ्तार कर जेल भेजा था।
यह ताजा मामला उस गिरफ्तारी के कुछ ही दिनों बाद सामने आया है। पुलिस को अब उसके आपराधिक इतिहास की भी गहन जांच करनी पड़ रही है।
कानून-व्यवस्था पर सवाल
राजधानी के हाई-प्रोफाइल इलाकों में इस तरह की घटनाएं कानून-व्यवस्था को लेकर गंभीर सवाल खड़े करती हैं।
आम जनता की सुरक्षा और अपराधियों के हौसले दोनों ही मुद्दे अब प्रशासन की पृष्ठभूमि में दबने की बजाय सतह पर आ रहे हैं।

