Lucknow News: बेटी के भविष्य को लेकर आत्महत्या करने की कोशिश पर मजबूर हुई मां,आरएमएल में चल रहा इलाज
Sandesh Wahak Digital Desk: राजधानी में हाईकोर्ट की लखनऊ खंडपीठ परिसर में अचानक उस वक्त अफरा-तफरी मच गई जब एक पीड़ित मां ने पांच पैरासिटामोल की गोलियां खा लीं। घटना से कोर्ट परिसर में हड़कंप मच गया। मौके पर मजूद अधिवक्ताओं ने तुरंत पीड़ित मां को डॉ. राम मनोहर लोहिया आयुर्विज्ञान संस्थान अस्पताल भेज दिया। जिसका इजाल अभी अस्पताल में चल रहा है। अस्पताल के चिकित्सकों ने बताया कि महिला अधिवक्ता अब खतरे से बाहर हैं।
जानकारी के दौरान पीड़ित अधिवक्ता महिला ने बताया कि मेरी बेटी प्रियम गुप्ता लाॅ मटीनियर गर्ल्स कॉलेज में कक्षा 12वीं की छात्रा है, ICSC बोर्ड की परि-नियमावली में प्रावधानित नियमानुसार छात्रा को अंग्रेजी सहित पांचवा वैकल्पिक और छटवां विषय हिन्दी विषय को दिलाने के लिए प्रधानाचार्या को पत्र दिया था।
हिन्दी विषय मांगने पर कॉलेज प्रबंधन से नोकझोंक

बेटी की उत्तम शिक्षा के लिए बेटी के लाॅ मटीनियर गर्ल्स कॉलेज में विषय परिवर्तन और 6 माह एडवांस मनमानी फीस को लेकर कॉलेज के प्रबंधन से कुछ कहा सुनी हो हो गयी। महिला अधिवक्ता का आरोप है कि भेद भाव पूर्ण और मन माने रवैये के कारण छःठा विषय हिंदी से प्रियम गुप्ता को एक साल कक्षा 11वीं में हिंदी विषय से वंचित रखा गया। अब मेरी बेटी कक्षा 12वीं में है। बेटी को हिंदी विषय में अच्छी रूचि है बेटी को परीक्षा देने की अनुमति दे। जिससे उसका भविष्य उज्जवल हो सके। छात्रा कॉलेज प्रबंधन से करीब 2 साल से हिन्दी सब्जेक्ट पढने की मांग कर रही है छात्रा की मां का आरोप है कि और आपने दूसरे बच्चे को हिन्दी सब्जेक्ट को छठे विषय के रूप मे दिया भी है, लेकिन मेरे द्वारा आपसे कई बार निवेदन करने पर भी हिंदी विषय नही दिया गया। जिससे परेशान होकर महिला अधिवक्ता ने हाईकोर्ट की लखनऊ खंडपीठ अर्जी लगायी है। अधिवक्ता महिला ने अपने पत्र में कॉलेज प्रबंधन पर कई आरोप और लगाए है।
कॉलेज प्रबंधन ने जिलाधिकारी और बीएसए के आदेश को किया दरकिनार

बेटी के उज्जवल भविष्य के लिए अधिवक्ता महिला पूर्व में लखनऊ जिलाधिकारी और बेसिक शिक्षा अधिकारी से न्याय की गुहार लगा चुकी है। लेकिन कॉलेज प्रबंधन के मनमाने रवैये ने आदेशों को दरकिनार कर दिया। जब कहीं सुनवाई नहीं हुई तो विवश होकर कोर्ट के शरण में अर्जी लगाई है। अधिवक्ता महिला ने बड़ा खुलासा करते हुए बताया कि ला मार्टीनियर कॉलेज लखनऊ के संचालन और प्रशासन की देखरेख “स्थानीय गवर्नर्स समिति” (Local Governing Committee – एलजीसी) द्वारा की जाती है लाॅ मटीनियर गर्ल्स कॉलेज के गवर्नर्स इलाहाबाद उच्च न्यायालय, लखनऊ खंडपीठ के वरिष्ठ न्यायाधीश न्यायमूर्ति अताउ रहमान मसूदी और कमिश्नर रोशन जैकब है। इसी वजह से हाईकोर्ट में न्याय मिलने में समय बीत रहा है। 2 अगस्त 2025 को वरिष्ठ न्यायाधीश न्यायमूर्ति अताउ रहमान मसूदी सेवानिवृत्ति हो रहे है। जिसके गूगल इन्फो से प्राप्त जानकारी के स्क्रीनशॉर्ट मजूद हैं। गूगल इन्फो की भनक पड़ते ही इरेस कराया गया है।

वीडियो और सुसाइड नोट में लगाए गंभीर आरोप

हाईकोर्ट के परिसर में महिला अधिवक्ता ने आत्महत्या करने से पहले एक विडिओ जारी किया। वीडियो में आत्महत्या करने का जिम्मेदार कॉलेज प्रबंधन को बताया है। हाईकोर्ट परिसर में 5 पैरासीटामोल की गोलियों को तोड़कर खा लिया। हालत बिगड़ने पर अधिवक्ताओं ने महिला अधिवक्ता को अस्पताल में भर्ती करा दिया। अस्पताल में महिला का उपचार चल रहा है। चिकित्सकों का कहना है मामला हाईकोर्ट परिसर से जुड़ा है, हालत में सुधार होते ही डिस्चार्ज कर दिया जायेगा।
सात महीने बीतने के बावजूद कोई उत्तर या कार्रवाई नहीं
मां का कहना है कि स्कूल ने SUPW (Socially Useful Productive Work) जैसे कार्य को विषय घोषित कर भ्रम फैलाया, ताकि एक विषय कम पढ़ाना पड़े और शिक्षक नियुक्त करने की आवश्यकता न हो। उन्होंने यहां तक सवाल उठाया कि क्या जिन छात्रों को छठा विषय पढ़ने की अनुमति दी गई है, उनके अभिभावकों ने अधिक डोनेशन दिया या वे किसी प्रभावशाली पृष्ठभूमि से आते हैं? उन्होंने यह आरोप भी लगाया कि बोर्ड परीक्षाओं में कुछ छात्रों को विशेष तैयारी और प्रश्न पत्र तक उपलब्ध कराए जाते हैं, ताकि वे टॉप कर सकें। इस पूरे मामले में ICSE बोर्ड को भी कई बार पत्र और ईमेल भेजे जा चुके हैं, यहां तक कि कोर्ट से भी स्कूल और बोर्ड को नोटिस जारी किया गया, लेकिन सात महीने बीतने के बावजूद कोई उत्तर या कार्रवाई नहीं हुई है।
हालांकि, इस मामले की सच्चाई की पुष्टि बोर्ड या स्कूल द्वारा अब तक नहीं की गई है, लेकिन यह मामला शिक्षा व्यवस्था और विद्यालयों की पारदर्शिता पर बड़ा सवाल खड़ा करता है। अगर आरोप सही हैं, तो यह सिर्फ एक छात्रा का नहीं, बल्कि पूरे सिस्टम पर सवाल है, जहाँ छात्राओं को उनके पसंदीदा विषय में पढ़ाई करने का अवसर सिर्फ इसलिए नहीं दिया जाता क्योंकि वे प्रभावशाली नहीं हैं।
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