Lucknow News: नगर निगम के कर्मचारियों ने किया काम बंद, थप्पड़ कांड पर दर्ज हुई FIR का विरोध

Sandesh Wahak Digital Desk: लखनऊ नगर निगम के नायब तहसीलदार रत्नेश श्रीवास्तव द्वारा थप्पड़ मारने के मामले में फंसे होने के बाद अब निगम के कर्मचारी खुलकर विरोध में उतर आए हैं। नायब तहसीलदार और राम मिलन नाम के व्यक्ति, दोनों पर क्रॉस मुकदमा दर्ज होने के बाद नगर निगम के संपत्ति विभाग के कर्मचारी और अधिकारी मुख्यालय पर धरने पर बैठ गए हैं। उनकी मांग है कि उनके खिलाफ दर्ज झूठा मुकदमा वापस लिया जाए।

धरने के दौरान कर्मचारियों ने लखनऊ पुलिस के खिलाफ नारेबाजी करते हुए आरोप लगाया कि पुलिस ने भू-माफियाओं के पक्ष में झूठा मुकदमा लिखा है, जिससे उनका मनोबल टूटा है। उनका कहना है कि जब तक यह एफआईआर वापस नहीं होगी, वे काम पर नहीं लौटेंगे।

क्या है पूरा मामला?

यह मामला 25 अगस्त, 2025 का है, जब नगर निगम की टीम सुशांत गोल्फ सिटी थाना क्षेत्र के मस्तेमऊ गांव में एक सरकारी जमीन से अवैध कब्जा हटाने गई थी। यह जमीन नगर निगम की थी, जिस पर राम मिलन ने 3000 वर्ग फुट पर अवैध कब्जा कर रखा था। निगम के मुताबिक, राम मिलन को पहले भी नोटिस भेजा गया था, लेकिन उसने कोई जवाब नहीं दिया। 23 अप्रैल को भी जब टीम कार्रवाई के लिए गई थी, तो उसने महिलाओं को आगे कर विरोध किया था।

25 अगस्त को टीम दोबारा कार्रवाई के लिए पहुंची, तो राम मिलन ने फिर से विरोध किया और वीडियो बनाने लगा। इसी दौरान नायब तहसीलदार ने कथित तौर पर उसे थप्पड़ मार दिया, जिसके बाद उसकी तबीयत खराब हो गई। मामले में नगर निगम ने राम मिलन पर सरकारी काम में बाधा डालने की एफआईआर दर्ज कराई, लेकिन राम मिलन की शिकायत पर नायब तहसीलदार और अन्य कर्मचारियों पर भी मुकदमा दर्ज हो गया।

कर्मचारियों का आरोप है कि पुलिस ने लेखपाल सुभाष कौशल के खिलाफ भी एफआईआर दर्ज की है, जबकि उनकी तैनाती उस जगह पर नहीं थी। नगर निगम के कर्मचारियों ने नगर आयुक्त गौरव कुमार को भी इस मामले में शिकायत सौंपी है और कहा है कि अगर ऐसी ही एफआईआर दर्ज होती रही, तो भू-माफियाओं के खिलाफ काम करना मुश्किल हो जाएगा।

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