Mishrilal Paswan: जानकीपुरम घोटाले में वसूली लंबित, एलडीए में चलाता था भ्रष्टों का गैंग
ईओडब्ल्यू के शिकंजे में आये पूर्व समाज कल्याण निदेशक मिश्रीलाल पासवान पर सरकारी तंत्र आज भी मेहरबान
Sandesh Wahak Digital Desk: करोड़ों के छात्रवृत्ति घोटाले में गिरफ्तार पूर्व समाज कल्याण निदेशक मिश्रीलाल पासवान के काले कारनामों की फेहरिस्त लम्बी है।

सिर्फ कल्याण से जुड़ी योजनाओं में ही नहीं बल्कि एलडीए में भी तैनाती के दौरान पासवान ने एक से बढक़र एक घोटालों की कलंक कथा लिखी थी। जानकीपुरम प्लॉट आवंटन घोटाले की सीबीआई जांच में दोषी पासवान को एलडीए में भ्रष्ट अफसरों और बाबुओं का गैंग चलाने के लिए जाना जाता था। आज भी सरकारी महकमें और ईडी इस रिटायर्ड करोड़पति पीसीएस अफसर पर पूरी तरह मेहरबान हैं।

गैंग से जुड़े बाबुओं व अफसरों के पास अकूत संपत्तियां
दरअसल सीबीआई की जांच रिपोर्ट के आधार पर 2005 में हुए एलडीए की जानकीपुरम आवासीय योजना के 177 भूखंडों में हुए घोटाले में 16 अफसरों-कर्मियों से डेढ़ करोड़ की वसूली होनी थी। चार साल पहले शासन में विशेष सचिव रणविजय सिंह ने पत्र लिखकर वसूली के लिए आरसी जारी करने को कहा था। घोटाले में दोषी पूर्व अनुसचिव राम प्रकाश सिंह समेत एक अन्य के खिलाफ आरसी जारी हुई। एलडीए में संयुक्त सचिव रहे मिश्रीलाल पासवान के खिलाफ लाखों की वसूली के लिए कोई कार्रवाई आगे नहीं बढ़ी।

एलडीए के एक अफसर वसूली नहीं होने का सारा ठीकरा शासन और नियुक्ति विभाग पर डालते हैं। एलडीए के सूत्रों के मुताबिक महानगर आवासीय योजना में नजूल और ट्रस्ट से जुडी सम्पत्तियों में बड़े घोटाले का आरोप तत्कालीन संयुक्त सचिव मिश्रीलाल पासवान पर है। इसका सबसे करीबी नजूल का पूर्व करोड़पति बाबू राम लौटन था।
उस दौर में पूर्व कार्यालय अधीक्षक राजाराम वर्मा समेत तमाम कर्मी पासवान के बेहद करीबियों में शुमार थे। इनकी कारगुजारियों की व्यापक जांच हो तो कई संपत्तियों में फर्जीवाड़ा बेनकाब होगा।
पासवान ने एलडीए में तैनाती के बाद तत्कालीन अपर सचिव भूपेंद्र सिंह के कार्यकाल में गोमतीनगर के विश्वासखण्ड में एचआईजी मकान भी कर्मचारी कोटे से आवंटित कराया था। वहीं महानगर समेत कई पॉश इलाकों में गहराई से जांच में कई भूखंड निकल सकते हैं। कानपुर रोड योजना में भी पासवान के कार्यकाल में लम्बे खेल किये जाने के संगीन आरोप हैं। आय से अधिक सम्पत्ति समेत तमाम जांचों में पासवान का नाम तो आया, लेकिन शिकंजा कभी नहीं कसा।

सीबीआई के तत्कालीन अफसर को मिला था भूखंड
एलडीए के जानकीपुरम प्लाट आवंटन घोटाले की सीबीआई जांच में दोषी एक कर्मी पुन: येन केन प्रकारेण एलडीए में बहाली पा गया है। सीबीआई ने भी इस घोटाले की जांच गहराई से नहीं की। वरना वीसी तक जरूर फंसते। सूत्रों के मुताबिक जांच से जुड़े सीबीआई के एक तत्कालीन कद्दावर अफसर को एलडीए से गोमतीनगर की पॉश योजना में करोड़ों का भूखंड भी मिला था।

तमाम सम्पत्तियां, ईडी की जांच नहीं हुई शुरू
पूर्व पीसीएस मिश्रीलाल पासवान की सम्पत्तियों की जांच मनी लांड्रिंग कानून के तहत कभी ईडी ने भी सख्ती से करना गंवारा नहीं समझा। एलडीए के एक अफसर बताते हैं कि एक पूर्व बाबू के साथ सांझेदारी में इसका पॉश इलाके में पेट्रोल पंप भी था। ऐसी कई सम्पत्तियां पासवान और उसके गैंग में शामिल एलडीए के भ्रष्टों ने लखनऊ में खड़ी कर रखी है।
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