Lucknow News: परिवहन निगम में अफसरशाही की मनमानी चरम पर, एमडी की खामोशी से सवाल खड़े

Sandesh Wahak Digital Desk:  उत्तर प्रदेश राज्य सड़क परिवहन निगम में इन दिनों नियमों की नहीं, बल्कि रसूख और सिफारिश की चल रही है। क्षेत्रीय प्रबंधक आर.के. त्रिपाठी पर गंभीर आरोप लग रहे हैं कि उन्होंने स्थानांतरण आदेशों को निजी पसंद-नापसंद का अखाड़ा बना दिया है। इधर कर्मचारियों की फाइलें धूल फांक रही हैं, उधर कुछ “अपने खास” आज भी उसी कुर्सी पर जमे बैठे हैं।

तबादलों में दोहरा मापदंड, अपनों को बचा रहे, दूसरों को जबरन हटा रहे

हाल ही में जारी स्थानांतरण सूची में जहां कुछ कर्मचारियों को एक झटके में खुद ही रिलीव कर दिया गया, वहीं कुछ को जानबूझकर रोका जा रहा है। नियम, प्रक्रिया और अनुशासन का पूरी तरह मजाक उड़ाया जा रहा है।

  • सरोज कुमार तिवारी, बीसी कैसरबाग डिपो — स्थानांतरण के बावजूद कैसरबाग एआरएम उन्हें रिलीव नहीं कर रहे।

  • राजेश कुमार यादव, बीसी उपनगरीय डिपो — तबादले के आदेश के बावजूद उपनगरीय एआरएम उन्हें जबरन रोके हुए हैं।

जानकारी के मुताबिक, तीन कर्मचारियों को रिलीव कर दिया, बिना किसी प्रक्रिया या अनुमति के – ये सब सिर्फ इसलिए क्योंकि वे ‘चहेते’ नहीं थे।

मुख्यालय की चुप्पी, एमडी की खामोशी, क्या ये मिलीभगत है?

निगम मुख्यालय और प्रबंध निदेशक की रहस्यमयी चुप्पी अब सवालों के घेरे में है। सवाल यह है कि जब नियमों की इस तरह धज्जियां उड़ रही हैं, तो उच्चाधिकारियों की आंखें क्यों मूंदी हुई हैं? क्या आरएम की मनमानी पर मुख्यालय की चुप्पी किसी सिस्टमेटिक गठजोड़ का संकेत है?

क्या होगी कार्रवाई, या फिर निगम की छवि ऐसे ही गिरती रहेगी?

जब एक विभाग में न्याय, प्रक्रिया और समानता की धज्जियां उड़ाई जाएं और जिम्मेदार अधिकारी ही नियमों को मरोड़ दें , तो कर्मचारी किसके पास जाएं? अब देखना यह है कि क्या निगम प्रबंधन इस गंभीर अनियमितता पर कोई सख्त कदम उठाएगा, या फिर यह भी एक ‘दफ्न हो जाने वाली’ फाइल बनकर रह जाएगी।

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