Lucknow News: MD के निर्देशों को ताक पर रख रहे जिम्मेदार, ACP में एकरूपता लाने का आदेश बना मज़ाक, कर्मचारियों में आक्रोश

Sandesh Wahak Digital Desk: सरकार ने वर्षों पहले एसीपी (Assured Career Progression) योजना में समानता और पारदर्शिता लाने के उद्देश्य से आदेश जारी किया था। इस आदेश के माध्यम से यह सुनिश्चित किया जाना था कि सभी विभागों में कर्मचारियों को समान रूप से पदोन्नति और वित्तीय लाभ मिलें। लेकिन हकीकत यह है कि इस महत्वपूर्ण आदेश को आज तक गंभीरता से लागू ही नहीं किया गया।

एसीपी आदेश का अमल न केवल कर्मचारियों के हित में है, बल्कि प्रशासनिक पारदर्शिता और न्यायसंगत शासन व्यवस्था का प्रतीक भी है। सरकार की मंशा को तभी सफलता मिलेगी जब अधिकारी समयबद्ध तरीके से इसे लागू करें।

कागज़ पर आदेश, ज़मीन पर सन्नाटा  

अप्रैल 2025 में प्रबंध निदेशक (MD) द्वारा फिर से स्पष्ट आदेश दिए गए कि पूर्व में जारी सभी शासनादेशों — जिनमें 1977 से लेकर 2015 तक के निर्देश शामिल हैं — को समाहित करते हुए एक समान प्रक्रिया अपनाई जाए। इसके बावजूद आज तक न तो विभागों ने इस पर अमल किया और न ही संबंधित अधिकारियों ने जिम्मेदारी समझी।

कर्मचारियों का कहना है कि बार-बार शासन से निर्देश मिलने के बावजूद जब अधिकारी ही आदेशों की अनदेखी करते हैं, तो फिर कौन जवाबदेह है? एमडी के साफ निर्देशों के बावजूद इस आदेश को ठंडे बस्ते में डाल देना, सिर्फ लापरवाही नहीं बल्कि कर्मचारियों के हक का सीधा उल्लंघन है।

कर्मचारी संघों में रोष

राज्य के विभिन्न विभागों में कार्यरत हजारों कर्मचारी इस आदेश के लागू न होने से प्रभावित हैं। कई कर्मचारी तो सेवा के अंतिम पड़ाव पर पहुंच गए हैं, लेकिन एसीपी का लाभ उन्हें आज तक नहीं मिला। कर्मचारी संगठनों ने चेतावनी दी है कि अगर जल्द ही आदेश का पालन नहीं हुआ, तो वे आंदोलन की राह पकड़ सकते हैं।

सरकार की मंशा अच्छी, अफसरों की नीयत ढीली

KLO
यूपी सीएम योगी आदित्यनाथ

जहां एक ओर सरकार कर्मचारियों को लाभ दिलाने के लिए लगातार निर्देश जारी कर रही है, वहीं दूसरी ओर कुछ अधिकारी इसे नज़रअंदाज़ कर आदेशों की अवहेलना कर रहे हैं। इससे न केवल सरकारी व्यवस्था पर सवाल उठते हैं, बल्कि कर्मचारियों के मनोबल पर भी असर पड़ता है।

1. समय से पदोन्नति (Promotion without Vacancy)

एसीपी योजना के तहत, यदि किसी कर्मचारी को लंबे समय तक पदोन्नति नहीं मिलती है तो उसे समय-आधारित पदोन्नति दी जाती है  भले ही पद रिक्त न हो।

 2. वेतन में बढ़ोत्तरी (Financial Upgradation)

समान वेतनमान वाले पद पर वर्षों से कार्यरत कर्मचारी को एसीपी लागू होने पर उच्च ग्रेड पे या लेवल में वेतनमान मिलता है, जिससे उसका मासिक वेतन सीधे बढ़ता है।

 3. भविष्य निधि (Pension/GPF) और पेंशन में लाभ

वेतनमान बढ़ने के कारण कर्मचारी की GPF, NPS और पेंशन अंशदान की राशि भी बढ़ेगी, जिसका असर रिटायरमेंट के बाद मिलने वाले लाभ पर भी पड़ेगा।

 4. मानसिक संतोष और मनोबल में वृद्धि

जब कर्मचारी को बिना रिक्ति के पदोन्नति या वेतनवृद्धि मिलती है, तो उसका मनोबल और कार्य के प्रति उत्साह बढ़ता है, जिससे काम की गुणवत्ता में भी सुधार होता है।

 5. सेवा की वरिष्ठता का सम्मान

लंबे समय से सेवा दे रहे कर्मचारियों को उनका वाजिब हक और सम्मान मिलता है। वरिष्ठता के आधार पर उन्हें समान लाभ देने से संगठन में विवाद और असंतोष की स्थिति नहीं बनती।

 6. सभी विभागों में समानता (Uniformity Across Departments)

एकरूपता से यह सुनिश्चित होगा कि सभी विभागों में कार्यरत कर्मचारी एक जैसे नियमों के अंतर्गत लाभान्वित हों और किसी के साथ भेदभाव न हो।

7. किसी भी कोर्ट केस या कानूनी विवाद की संभावना कम होगी

जब सभी कर्मचारियों को नियमानुसार लाभ मिलेंगे तो विभागों पर कोर्ट केस का बोझ कम होगा और शासन की छवि बेहतर बनेगी। अब सवाल यह है – क्या शासन अपने ही आदेशों को लागू कराने में नाकाम है? और क्या ऐसे गैर-जिम्मेदार अधिकारियों पर कभी कोई कार्रवाई होगी?

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