लखनऊ: ‘मन की बात’ के दिन SGPGI में महादान, संदीप कुमार ने जाते-जाते 5 लोगों को दी नई जिंदगी

Sandesh Wahak Digital Desk: प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने जब ‘मन की बात’ के 131वें एपिसोड में देश को अंगदान के लिए प्रेरित किया, ठीक उसी दिन लखनऊ के एसजीपीजीआई (SGPGI) में अंगदान का एक बड़ा और सफल अभियान संपन्न हुआ। लखनऊ निवासी 42 वर्षीय संदीप कुमार की ब्रेन स्टेम मृत्यु के बाद उनके परिजनों ने अंगदान का साहसिक निर्णय लिया, जिससे पाँच मरीजों को जीवनदान मिला।

दुर्घटना से ‘अमरत्व’ तक का सफर

हादसा: संदीप कुमार 7 फरवरी 2026 को सड़क दुर्घटना में गंभीर रूप से घायल हुए थे।

उपचार: 21 फरवरी को उन्हें एसजीपीजीआई के एपेक्स ट्रॉमा सेंटर में भर्ती कराया गया।

घोषणा: 22 फरवरी को विशेषज्ञों के पैनल ने उन्हें ‘ब्रेन स्टेम डेड’ घोषित कर दिया।

साहस: संदीप की पत्नी और परिजनों ने दुख की घड़ी में भी मानवता का परिचय देते हुए उनके अंग दान करने की सहमति दी।

इन अंगों का हुआ सफल प्रत्यारोपण

सोट्टो-यूपी (SOTTO-UP) के समन्वय से एसजीपीजीआई और केजीएमयू (KGMU) की टीमों ने मिलकर इस जटिल प्रक्रिया को पूरा किया। केजीएमयू की प्रतीक्षा सूची में पंजीकृत एक गंभीर मरीज को प्रत्यारोपित किया गया। यूरोलॉजी और नेफ्रोलॉजी विभाग की टीम ने सफलतापूर्वक किडनी रिट्रीवल और ट्रांसप्लांट किया। नेत्र विभाग की टीम ने कॉर्निया निकालकर जरूरतमंदों को दृष्टि प्रदान की।

संस्थान की बड़ी उपलब्धि और सम्मान

आपको बता दें कि करीब 20 साल बाद एसजीपीजीआई में ब्रेन डेथ के बाद यह पहला ‘मल्टी-ऑर्गन डोनेशन’ (बहु-अंगदान) संपन्न हुआ। दाता संदीप कुमार को संस्थान की ओर से श्रद्धांजलि स्वरूप ‘गार्ड ऑफ ऑनर’ प्रदान किया गया। अंगदान की सहमति मिलने पर एसजीपीजीआई ने संदीप के उपचार का संपूर्ण व्यय माफ कर दिया।

चिकित्सकों की टीम

इस महाअभियान में डॉ. एम.एस. अंसारी, डॉ. संजय सुरेका, डॉ. संचिता रुस्तगी (यूरोलॉजी), डॉ. नारायण प्रसाद (नेफ्रोलॉजी), डॉ. अपिजीत कौर (नेत्र विभाग) और डॉ. देवेंद्र गुप्ता (एनेस्थीसिया) के नेतृत्व वाली टीमों ने महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। सोट्टो-यूपी के ट्रांसप्लांट कोऑर्डिनेटर हरीश चोपड़ा ने पूरी प्रक्रिया का समन्वय किया।

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