लखनऊ पुलिस की बड़ी कार्रवाई, 2.75 करोड़ के GST घोटाले का पर्दाफाश, 4 मुख्य आरोपी गिरफ्तार

Sandesh Wahak Digital Desk: लखनऊ पुलिस कमिश्नरेट ने GST कर चोरी करने वाले एक बहुत बड़े और संगठित अंतरराज्यीय गिरोह का भंडाफोड़ किया है। साइबर सेल, सर्विलांस टीम और थाना इटौंजा की संयुक्त कार्रवाई में पौने तीन करोड़ (2.75 करोड़) रुपये से अधिक के राजस्व घाटे का खुलासा हुआ है।

मुख्य आरोपी और उनकी गिरफ्तारी

पुलिस ने गिरोह के 04 सक्रिय सदस्यों को गिरफ्तार किया है, जबकि मुख्य मास्टरमाइंड अम्मार अंसारी (जो पहले भी सीतापुर से जेल जा चुका है) की तलाश जारी है।

अभियुक्त का नाम भूमिका विवरण
प्रशांत बेन्जवाल मास्टरमाइंड पूर्व कैशियर; फर्जी इनवॉइस बनाना और ITC बेचना।
तबस्सुम (जान्हवी) संचालक जरूरतमंद लोगों के दस्तावेज जुटाना और फर्जी फर्में बनवाना।
सुमित सौरभ लाभार्थी वास्तविक फर्म मालिक; टैक्स चोरी के लिए बोगस इनवॉइस खरीदना।
दौलत राम डमी मालिक ₹20,000 के लालच में अपने दस्तावेज (आधार/पैन) देने वाला मजदूर।

अपराध का तरीका (Modus Operandi)

यह गिरोह बेहद शातिर तरीके से सरकार को चूना लगा रहा था।

  1. डाक्यूमेंट्स की जुगाड़: तबस्सुम और प्रशांत गरीब लोगों को 10-20 हजार रुपये का लालच देकर उनके आधार कार्ड, पैन कार्ड और बैंक खाते हासिल करते थे।

  2. फर्जी रजिस्ट्रेशन: इन दस्तावेजों और फर्जी किरायानामा (Rent Agreement) के आधार पर GST पोर्टल पर फर्म रजिस्टर कराई जाती थी। गिरोह ने ऐसी 15 से अधिक बोगस फर्में बनाई थीं।

  3. बोगस ITC का खेल: ये फर्में कागज पर तो थीं लेकिन हकीकत में इनका कोई ऑफिस या व्यापार नहीं था। इनके जरिए फर्जी इनवॉइस और ई-वे बिल जारी कर 1% कमीशन पर अन्य कंपनियों को ‘इनपुट टैक्स क्रेडिट’ (ITC) बेचा जाता था।

  4. कागजी हेरफेर: स्वराज ट्रेडर्स (M/S Swaraj Traders) जैसी फर्मों के नाम पर करोड़ों का स्क्रैप और पाइप का लेन-देन सिर्फ कागजों पर दिखाया गया।

बरामदगी का विवरण 

पुलिस ने अभियुक्तों के कब्जे से भारी मात्रा में डिजिटल और दस्तावेजी साक्ष्य बरामद किए हैं।

  • नकदी और बैंक: 20 डेबिट कार्ड, 05 चेकबुक, 03 पासबुक और 03 हस्ताक्षरित चेक।

  • इलेक्ट्रॉनिक्स: 11 मोबाइल फोन, 26 सिम कार्ड, 01 लैपटॉप (HP ProBook) और 05 मेमोरी कार्ड।

  • फर्जी दस्तावेज: 136 से अधिक फर्जी इनवॉइस (Invoice), 35 आधार कार्ड और 25 पैन कार्ड की छाया प्रतियां।

  • अन्य: फर्जी किरायानामा, खतौनी, निवास प्रमाण पत्र और 05 फर्मों की यूजर आईडी व पासवर्ड।

केस की पृष्ठभूमि

इस घोटाले की शुरुआत 02 सितंबर 2025 को हुई जब राज्य कर विभाग (GST) के सहायक आयुक्त अभिमन्यु पाठक ने ‘स्वराज ट्रेडर्स’ के खिलाफ शिकायत दर्ज कराई। जांच में पाया गया कि इस एक अकेली डमी फर्म ने 52 लाख रुपये से अधिक की बोगस ITC बेची थी। गहराई से जांच करने पर पता चला कि यह एक संगठित गिरोह है जो करोड़ों का चूना लगा रहा है।

कानूनी कार्रवाई

थाना इंटौंजा में पंजीकृत मु.अ.सं. 157/2025 के तहत धारा 420, 419, 467, 468, 471 और 34 भादवि (IPC) के तहत मामला दर्ज किया गया है। पुलिस अब इस गिरोह के अन्य नेटवर्क और उनके द्वारा लाभ उठाने वाली अन्य कंपनियों की कुंडली खंगाल रही है।

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