ऑनलाइन गेमिंग फ्रॉड में गई थी लखनऊ के किशोर की जान, पुलिस ने झारखंड से पकड़ा मास्टरमाइंड
Sandesh Wahak Digital Desk: उत्तर प्रदेश पुलिस कमिश्नरेट लखनऊ की मोहनलालगंज थाना और साइबर सेल की संयुक्त टीम ने ऑनलाइन गेमिंग से जुड़े साइबर फ्रॉड और आत्महत्या के एक सनसनीखेज मामले का सफलतापूर्वक खुलासा किया है। इस मामले में पुलिस ने मुख्य अभियुक्त को झारखंड के पूर्वी सिंहभूम से गिरफ्तार किया है।
क्या है पूरा मामला?
15 सितंबर 2025 को लखनऊ के मोहनलालगंज थाना क्षेत्र के ग्राम धनुवासांड निवासी यश कुमार (उम्र 14 वर्ष) ने आत्महत्या कर ली थी। मृतक के पिता, सुरेश कुमार ने जब अपना बैंक स्टेटमेंट देखा, तो उन्हें लाखों रुपये के संदिग्ध ट्रांजैक्शन मिले। इसके बाद उन्होंने मोहनलालगंज थाने में मु0अ0सं0- 373/2025 धारा 108 BNS एवं 66D IT ACT के तहत मुकदमा दर्ज कराया। जांच में सामने आया कि मृतक ‘फ्री फायर मैक्स’ ऑनलाइन गेम खेलता था। अभियुक्तों ने इसी गेम के माध्यम से उसे अपने जाल में फंसाकर लगभग 13 लाख रुपये की धोखाधड़ी की थी।
शातिर अभियुक्त गिरफ्तार, सबूत मिटाने की कोशिश विफल
पुलिस टीमों की जांच में पता चला कि मृतक से लगातार संपर्क में रहने वाला अभियुक्त काफी शातिर था। उसने मृतक की ईमेल आईडी और पासवर्ड तक हासिल कर लिया था। घटना के तुरंत बाद, अभियुक्त ने मृतक का मोबाइल फॉर्मेट कर सबूत नष्ट करने की कोशिश भी की थी, जिसे साइबर सेल की तकनीकी मदद से विफल कर दिया गया।
संयुक्त अभियान में पुलिस ने सनत गोराई (उम्र 20 वर्ष), निवासी घाटशिला, पूर्वी सिंहभूम, झारखंड से पूछताछ की। इसके साथ ही एक बाल अपचारी से भी पूछताछ की जा रही है।

बरामदगी
- 4 लाख 71 हजार रुपये नकद।
- 1.5 लाख की कीमत का एक एप्पल लैपटॉप (मृतक के पैसे से खरीदा गया)।
- विभिन्न वॉलेट्स से ₹1.5 लाख रुपये फ्रीज कराए गए हैं, जिन्हें वापस करने की प्रक्रिया जारी है।
ऐसे फंसाता था बच्चों को जाल में (धोखाधड़ी का तरीका)
अभियुक्त ने पूछताछ में बताया कि वह फ्री फायर मैक्स गेम खेलने के दौरान यश कुमार से मिला। चैट और कॉल के माध्यम से उसने यश को गेम आईडी बेचने का लालच दिया और विश्वास में लेकर रुपये ट्रांसफर कराए, लेकिन उसे आईडी नहीं दी। जब यश अपने पैसे वापस मांगता था, तो अभियुक्त उसे धमकी देता था।
ठगी का तरीका
आरोपी ऑनलाइन गेम खेलते समय बच्चों से दोस्ती करना और सामान्य बातचीत से विश्वास बनाना। इसके बाद गेम में डायमंड्स/कॉइन्स, बेहतर रैंक या विशेष सुविधाएं दिलाने का झांसा देना। इसके बाद पेमेंट ऐप्स, यूपीआई या बैंक ट्रांसफर के माध्यम से छोटे-छोटे अमाउंट से शुरुआत कर लाखों तक की रकम वसूलना। पैसे न देने पर अकाउंट बंद करने की धमकी देकर बच्चों पर लगातार मानसिक दबाव बनाना। धोखाधड़ी के बाद तुरंत मोबाइल फॉर्मेट कर और ईमेल आईडी का पासवर्ड बदलकर सभी डिजिटल प्रमाण नष्ट करने की कोशिश करना।
समाज के लिए गंभीर चेतावनी: बच्चों को ऑनलाइन फ्रॉड से कैसे बचाएं?
यह घटना केवल एक आपराधिक मामला नहीं, बल्कि ऑनलाइन गेमिंग की लत (Addiction) और बच्चों के मानसिक शोषण के खिलाफ समाज के लिए एक गंभीर चेतावनी है।
माता-पिता के लिए पुलिस की अपील और सुझाव
- ऑनलाइन गेमिंग की लत से बचाएं:
फ्री फायर, पब्जी जैसे गेम्स बच्चों को मानसिक रूप से प्रभावित कर रहे हैं।
लत लगने पर बच्चे अजनबियों के संपर्क में आकर आर्थिक और मानसिक शोषण का शिकार हो जाते हैं।
- ऑनलाइन फ्रॉड से बचाव के उपाय:
बच्चों को बताएं कि वे बैंक विवरण, पासवर्ड, ओटीपी या ईमेल आईडी कभी भी किसी अजनबी को साझा न करें।
अभिभावक अपने बच्चों की ऑनलाइन गतिविधियों पर कड़ी निगरानी रखें।
किसी भी संदिग्ध लेन-देन या साइबर ठगी की सूचना तुरंत साइबर हेल्पलाइन 1930 या स्थानीय पुलिस को दें।
- पैरेंटल कंट्रोल (Parental Control) सक्रिय करें:
बच्चों के मोबाइल में Google Family Link App (पेरेंट्स और बच्चों के फ़ोन में इंस्टॉल करके) एक्टिव करें।
इस ऐप से आप गेम्स को ब्लॉक या लिमिट कर सकते हैं, स्क्रीन टाइम लिमिट सेट कर सकते हैं और लोकेशन ट्रैक कर सकते हैं।
- पैसे खर्च होने से रोकें (In-app purchases):
Google Play Store सेटिंग्स में जाकर ‘Require authentication for purchases’ विकल्प को ‘For all purchases’ पर सेट करें। इससे हर खरीदारी से पहले पासवर्ड डालना अनिवार्य हो जाएगा। बच्चों के डिवाइस से UPI, कार्ड्स आदि लिंक न करें।

