लखनऊ विश्वविद्यालय में ‘मेस कांड’: जहरीला खाना खाकर छात्रा हुई बेहोश, विरोध में छात्राओं का अनशन
Sandesh Wahak Digital Desk: लखनऊ विश्वविद्यालय का गंगा हॉस्टल बुधवार को छात्राओं के विरोध प्रदर्शन का अखाड़ा बन गया। छात्राओं का आरोप है कि मेस में परोसा जा रहा भोजन न केवल बेस्वाद है, बल्कि ‘जहरीला’ भी है। दूषित भोजन खाने के बाद लॉ की एक छात्रा के बेहोश होने और समय पर इलाज न मिलने से गुस्सा फूट पड़ा। छात्राओं ने रात का भोजन त्याग दिया और मेस संचालक के खिलाफ कार्रवाई की मांग को लेकर धरने पर बैठ गईं।
दाल में कीड़े और फिर उल्टियां
लॉ फैकल्टी की फाइनल ईयर की छात्रा मेघना शाह ने बुधवार दोपहर मेस का खाना खाया था। छात्राओं का दावा है कि दाल में कीड़े थे और खाने का स्वाद बेहद खराब था। खाना खाने के कुछ ही देर बाद मेघना को तेज उल्टियां होने लगीं और वह बेहोश हो गईं। साथी छात्राओं ने इसका वीडियो भी बनाया और वार्डन व प्रोवोस्ट को सूचना दी।

डॉक्टर नहीं मिले, मिली तो बस धमकी
आंदोलनकारी छात्राओं ने गंभीर आरोप लगाते हुए कहा कि तबीयत बिगड़ने के बावजूद समय पर मेडिकल हेल्प नहीं मिली। मेस की गुणवत्ता को लेकर कई बार शिकायत की गई, लेकिन कोई सुधार नहीं हुआ। छात्राओं का आरोप है कि जब वे विरोध में धरने पर बैठीं, तो हॉस्टल की प्रोवोस्ट नीतम सिंह ने उन्हें कथित तौर पर धमकाया और दबाव बनाने की कोशिश की।
छात्रा को सिर्फ एंजाइटी
विवाद बढ़ता देख लखनऊ विश्वविद्यालय के प्रवक्ता मुकुल श्रीवास्तव ने बयान जारी किया। उन्होंने कहा कि पीड़ित छात्रा को डॉक्टर से कंसल्ट कराया गया है और उसे मेडिकल सुविधा दी गई है। प्रवक्ता के अनुसार, छात्रा की स्थिति अब स्थिर है और उसे केवल ‘एंजाइटी’ (घबराहट) की शिकायत थी। उन्होंने आश्वासन दिया कि खाने की गुणवत्ता की जांच कराई जाएगी और स्टूडेंट्स की सेहत से कोई समझौता नहीं होगा।
सियासी मोड़: छात्रनेताओं ने घेरा प्रशासन
इस मामले ने अब राजनीतिक रूप भी ले लिया है। समाजवादी छात्रसभा के उपाध्यक्ष और छात्रनेता आदित्य पाण्डेय ने विश्वविद्यालय प्रशासन और सरकार पर कड़ा प्रहार किया। उन्होंने कहा, “छात्राएं रात भर भूखी-प्यासी धरने पर बैठी रहीं और प्रशासन सोता रहा। क्या यही है ‘बेटी बचाओ, बेटी पढ़ाओ’ अभियान? ज़हरीला खाना खाने से छात्रा की जान जोखिम में थी और समय पर इलाज तक नहीं मिला।”
छात्राओं का स्पष्ट कहना है कि जब तक मेस संचालक के खिलाफ सख्त एक्शन नहीं होता और शुद्ध भोजन की गारंटी नहीं मिलती, उनका विरोध जारी रहेगा।
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