लखनऊ का ऐतिहासिक ‘रिफा-ए-आम क्लब’ अतिक्रमण से मुक्त, एलडीए ने ढहाई अवैध इमारतें
Sandesh Wahak Digital Desk: लखनऊ के ऐतिहासिक रिफा-ए-आम क्लब को अवैध कब्ज़े से छुड़ाने के लिए लखनऊ विकास प्राधिकरण (एलडीए) ने आज एक बड़ी कार्रवाई की। भारी संख्या में पुलिस बल और बुलडोजर के साथ एलडीए की टीम क्लब परिसर में पहुंची और अवैध निर्माणों को गिरा दिया।

जैसे ही एलडीए की टीम ने कार्रवाई शुरू की, वहां तनाव का माहौल बन गया। कुछ दुकानदारों और स्थानीय लोगों ने विरोध करने की कोशिश की, लेकिन पुलिस की सख़्ती के आगे उनकी एक न चली। इस दौरान एक दिल दहला देने वाला नज़ारा भी सामने आया, जब स्कूल से लौटे तीसरी कक्षा के एक बच्चे ने अपना घर टूटा हुआ देखा तो वह रोने लगा।
क्या है रिफा-ए-आम क्लब का इतिहास?
यह क्लब 1860 में अवध के नवाबों और रियासतों ने मिलकर बनवाया था। कहानी यह है कि उस समय अंग्रेज़ों ने अपने क्लबों के बाहर ‘भारतीय और कुत्तों का प्रवेश वर्जित है’ लिख रखा था। इस अपमान से आहत होकर ओयल, महमूदाबाद और मनकापुर जैसे रियासतों के राजाओं ने अपना एक क्लब बनाने का फ़ैसला किया, और इसी तरह रिफा-ए-आम क्लब का निर्माण हुआ।

अवध के तीसरे नवाब की वंशज नफीस जहां के वकील अभिनव नाथ त्रिपाठी ने एलडीए की इस कार्रवाई को ग़लत बताया है। उन्होंने कहा कि ज़मीन पर कई लोगों का दावा है और मामला अभी कोर्ट में चल रहा है, इसलिए एलडीए को यह कार्रवाई नहीं करनी चाहिए थी। परिसर में कई जगह ऐसे बैनर भी लगे थे, जिन पर लिखा था कि ज़मीन का मामला कोर्ट में है, लेकिन बुलडोजर ने उन बैनरों को भी हटा दिया।
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