मदरसा नियुक्ति घोटाला: मृतक आश्रित को शिक्षक बनाने के बजाय बनाया क्लर्क, फर्जी शपथ पत्र से हुआ खेल उजागर

मदरसा प्रबंधन पर पुलिस का शिकंजा, तीन के खिलाफ मुकदमा दर्ज,  आरोपियों की तलाश जारी

Sandesh Wahak Digital Desk: उत्तर प्रदेश के बलरामपुर जिले के तुलसीपुर थाना क्षेत्र में स्थित मदरसा जामिया अनवारुल उलूम में मृतक आश्रित की नियुक्ति को लेकर हुए फर्जीवाड़े ने न सिर्फ मदरसा प्रबंधन, बल्कि अल्पसंख्यक कल्याण विभाग की कार्यप्रणाली पर भी गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। हाई कोर्ट की सख्ती और फोरेंसिक जांच रिपोर्ट के बाद आखिरकार इस मामले में पुलिस कार्रवाई शुरू हो सकी है।

अजीज अहमद और मेराज अहमद

प्रधानाचार्य व लिपिक समेत एक अन्य अज्ञात पर धोखाधड़ी का मुकदमा दर्ज

जानकारी के अनुसार, मदरसा जामिया अनवारुल उलूम में कार्यरत एक शिक्षक के निधन के बाद उनके पुत्र मो. हसन रजा को मृतक आश्रित कोटे के तहत नियुक्त किया जाना था। नियमों के मुताबिक, जिस पद पर कर्मचारी की मृत्यु होती है, आश्रित को उसी स्तर के पद पर नियुक्ति दी जाती है। इस आधार पर हसन रजा को शिक्षक पद मिलना चाहिए था। आरोप है कि मदरसे के प्रधानाचार्य मेराज अहमद और लिपिक अजीज अहमद ने प्रबंधन समिति के साथ मिलकर नियमों को दरकिनार किया और 25 मई 2020 को हसन रजा की नियुक्ति कनिष्ठ सहायक (क्लर्क) के पद पर कर दी।

हसन रजा ने इस नियुक्ति का विरोध किया और शिक्षक पद पर बहाली की मांग की, लेकिन मदरसा प्रबंधन ने उनकी बात अनसुनी कर दी। इसके बाद उन्होंने उच्च अधिकारियों से शिकायत की। शिकायत के बाद विभागीय हस्तक्षेप से उन्हें शिक्षक पद पर नियुक्ति तो मिल गई, लेकिन पहले की गई अनियमितता को छिपाने के लिए कथित तौर पर एक और फर्जीवाड़ा किया गया।

तुलसीपुर के मदरसे में बड़ा फर्जीवाड़ा

जांच के दौरान मदरसे की फाइल में 2 जुलाई 2020 का एक शपथ पत्र पाया गया, जिसमें यह दर्शाया गया था कि हसन रजा शिक्षक बनने की योग्यता नहीं रखते। हसन रजा ने 27 सितंबर 2021 को शपथ पत्र देकर इसे पूरी तरह फर्जी बताया। मामले की गंभीरता को देखते हुए दस्तावेजों को विधि विज्ञान प्रयोगशाला भेजा गया। फोरेंसिक रिपोर्ट दिनांक 21 अक्टूबर 2022 में स्पष्ट हुआ कि शपथ पत्र पर किए गए हस्ताक्षर हसन रजा के नहीं, बल्कि जाली हैं।

यशवंत मौर्य, जिला अल्पसंख्यक कल्याण अधिकारी, बलरामपुर

हाई कोर्ट की सख्ती के बाद खुली पोल

मामला हाई कोर्ट पहुंचने के बाद अधिकारियों में हड़कंप मच गया। शासन स्तर से निर्देश मिलने पर 15 दिसंबर 2025 को एफआईआर दर्ज कराने का आदेश जारी हुआ। इसके क्रम में जिला अल्पसंख्यक कल्याण अधिकारी यशवन्त मौर्य की तहरीर पर 16 दिसंबर 2025 को तुलसीपुर थाने में प्रधानाचार्य, लिपिक और अन्य के खिलाफ धोखाधड़ी, कूट रचना और फर्जी दस्तावेजों के इस्तेमाल की गंभीर धाराओं में मुकदमा दर्ज किया गया।

मदरसा प्रबंधन पर पुलिस का शिकंजा, तीन के खिलाफ मुकदमा दर्ज

पुलिस के अनुसार, एफआईआर दर्ज होते ही आरोपी संपर्क से बाहर हो गए हैं और उनके मोबाइल फोन बंद आ रहे हैं। वहीं, तत्कालीन जिला अल्पसंख्यक कल्याण अधिकारी की भूमिका की भी जांच किए जाने की चर्चा है। इसके साथ ही, तत्कालीन रजिस्ट्रार की भी भूमिका संदिग्ध नजर आ रही है क्योंकि जिला अल्पसंख्यक कल्याण अधिकारी प्रबंधकीय तंत्र के अनुमोदन पत्र को जांच करने के बाद अनुमोदन करने के लिए मदरसा बोर्ड के रजिस्ट्रार के पास प्रेषित करता है।

उसके बाद मदरसा बोर्ड के रजिस्टर पूरे पत्रावलियों की जांच करते हैं और जांच में यदि किसी भी तरह का कोई दोष नजर आता है। तो उन पत्रावलियों को पुनः या तो जिला अल्पसंख्यक कल्याण अधिकारी के पास भेज देते हैं या उसे खारिज कर देते हैं। जबकि इस मामले में इस तरह के नियम का कोई पालन नहीं किया गया। फिलहाल पुलिस विवेचना में जुटी है और जल्द गिरफ्तारी की संभावना जताई जा रही है। अभी तक पुलिस व आरोपियों का कोई पक्ष नहीं मिल सका है।

रिपोर्ट: योगेंद्र त्रिपाठी

 

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