माघ मेला 2026: सनातन किन्नर अखाड़े का विस्तार; देश की पहली किन्नर वकील बनीं महामंडलेश्वर

Sandesh Wahak Digital Desk: संगम नगरी प्रयागराज में चल रहे माघ मेला 2026 के दौरान एक ऐतिहासिक आध्यात्मिक घटनाक्रम देखने को मिला। सनातनी किन्नर अखाड़े ने अपनी परंपराओं का विस्तार करते हुए पहली बार भव्य पट्टाभिषेक कार्यक्रम आयोजित किया। इस समारोह में समाज के विभिन्न वर्गों को सनातन धर्म से जोड़ते हुए 11 संतों को प्रतिष्ठित पदों पर आसीन किया गया।

मुख्य आकर्षण: पहली किन्नर अधिवक्ता को मिली कमान

इस पट्टाभिषेक की सबसे बड़ी विशेषता अभिरूपा रंजीता का महामंडलेश्वर बनना रहा। कोलकाता की रहने वाली अभिरूपा देश की पहली किन्नर अधिवक्ता (Lawyer) हैं। उनके साथ ही समाज को समावेशी संदेश देने के लिए एक पुरुष और दो महिलाओं को भी अखाड़े में महत्वपूर्ण जिम्मेदारियां दी गई हैं।

कठिन अनुष्ठान और दीक्षा

परंपरागत 13 अखाड़ों की तरह ही किन्नर अखाड़े ने भी सभी कड़े नियमों का पालन किया:

पांच गुरुओं ने दीक्षा दी, जिसमें लंगोटी, कंठी, भस्म और चोटी काटने की रस्में निभाई गईं।

संतों ने संगम तट पर स्वयं का पिंडदान कर सांसारिक मोह त्यागने का संकल्प लिया।

आचार्य महामंडलेश्वर कौशल्यानंद गिरि ‘टीना मां’ ने सभी को गुरुमंत्र देकर सनातन पथ पर अग्रसर किया।

रील नहीं, सनातन धर्म बढ़ाओ

अखाड़े की प्रमुख आचार्य महामंडलेश्वर डॉ. लक्ष्मी नारायण त्रिपाठी ने भी नए संतों को दीक्षा दी। उन्होंने आधुनिक दौर के भटकाव पर कड़ा संदेश देते हुए कहा, “सोशल मीडिया पर केवल रील न बनाएं, बल्कि सनातन धर्म के प्रचार-प्रसार और सेवा में जुटें।” भविष्य की योजना अखाड़े ने घोषणा की है कि आने वाले समय में कश्मीरी पंडितों और दक्षिण भारत के समुदायों को भी अखाड़े से जोड़कर संत बनाया जाएगा। ओडिशा की महामंडलेश्वर स्वामी देवांशी को अखाड़े के अध्यक्ष पद की जिम्मेदारी सौंपी गई है।

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