महाराष्ट्र नगर निगम चुनाव: वोटिंग से पहले ही भाजपा की बंपर जीत, 69 में से 68 सीटों पर महायुति का कब्जा
Sandesh Wahak Digital Desk: महाराष्ट्र नगर निगम चुनावों के लिए नामांकन वापसी का आखिरी दिन ड्रामे, तनाव और सियासी उठापटक से भरा रहा। चुनाव मैदान से बागियों को हटाने की कोशिशों के बीच महायुति गठबंधन (BJP, शिंदे सेना और अजित पवार गुट) ने एकतरफा बढ़त बना ली है। कुल 69 सीटों पर उम्मीदवार निर्विरोध चुने गए हैं, जिनमें से अकेले भाजपा ने 44 सीटों पर जीत दर्ज कर अपनी ताकत का अहसास करा दिया है।
भाजपा और शिवसेना का दबदबा
आंकड़ों पर गौर करें तो महायुति ने 68 सीटों पर निर्विरोध कब्जा किया है।
भाजपा (44 सीटें): सबसे ज्यादा फायदा कल्याण (15 सीटें), भिवंडी, पनवेल और जलगांव में मिला।
शिवसेना-शिंदे गुट (22 सीटें): सीएम शिंदे के गढ़ ठाणे में 7 और कल्याण में 7 सीटों पर निर्विरोध जीत मिली।
NCP-अजित पवार (02 सीटें): जलगांव में दो सीटों पर कब्जा जमाया।
अन्य: मालेगांव में इस्लामिक पार्टी ने एक सीट निर्विरोध जीती।
नामांकन वापसी का दिन शांत नहीं रहा। सोलापुर में भाजपा के दो गुटों के बीच ऐसी भिड़ंत हुई कि एक कार्यकर्ता को अपनी जान गंवानी पड़ी। वहीं नागपुर में बागी उम्मीदवार किसान गावंडे को उनके ही समर्थकों ने घर में कैद कर दिया ताकि वे नामांकन वापस न ले सकें, हालांकि बाद में वे मान गए।
छत्रपति संभाजीनगर में पार्टी के वफादार कार्यकर्ताओं ने बाहरी लोगों को टिकट देने पर मंत्रियों के खिलाफ मोर्चा खोल दिया। वहीं, प्रशांत भदाणे-पाटिल नाम के एक बागी ने, जिसने पहले आत्मदाह की कोशिश की थी, पीछे हटने से साफ इनकार कर दिया।
बागियों ने बढ़ाई धड़कनें
भले ही महायुति ने शुरुआती बढ़त बना ली है, लेकिन मुंबई में भाजपा के 5 बागियों ने मैदान छोड़ने से मना कर दिया है। यही हाल उद्धव और राज ठाकरे की पार्टियों का भी है, जहां करीब 9 वार्डों में भाई-भाई एक-दूसरे को मनाने में नाकाम रहे। भिवंडी में तो ठाकरे गुटों के बीच गठबंधन ही टूट गया और दोनों ने एक-दूसरे के खिलाफ ताल ठोक दी है। कांग्रेस खेमे में भी दिन भर मान-मनौव्वल का दौर चला। विकास ठाकरे और नितिन राउत जैसे दिग्गज नेताओं ने बागियों को बड़े पदों का लालच देकर मैदान से हटाने की कोशिश की।
मुंबई (BMC) सहित 29 नगर निगमों के लिए असली मुकाबला 15 जनवरी को होगा। हालांकि, निर्विरोध मिली इन जीत ने महायुति के कार्यकर्ताओं में जोश भर दिया है, लेकिन बागियों के रुख ने विपक्षी और सत्ताधारी दोनों ही खेमों की नींद उड़ा रखी है।

