Maharastra News : मुस्लिमों का 5% आरक्षण खत्म, फडणवीस सरकार ने रद्द किया पुराना कोटा
Sandesh Wahak Digital Desk : मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस के नेतृत्व वाली सरकार ने मुस्लिम समुदाय को दिए जाने वाले 5 प्रतिशत आरक्षण को पूरी तरह से समाप्त कर दिया है. यह आरक्षण पिछली सरकारों द्वारा शिक्षण संस्थानों और सरकारी नौकरियों में लागू किया गया था, जिसे अब रद्द करने का औपचारिक निर्णय लिया गया है.
राज्य के सामाजिक न्याय विभाग ने मंगलवार की रात एक सरकारी परिपत्र (जीआर) जारी कर स्पष्ट कर दिया कि एसईबीसी (सामाजिक व शैक्षणिक रूप से पिछड़ा वर्ग) या एसबीसी-ए श्रेणी के तहत मुसलमानों के लिए आरक्षित 5% कोटा अब प्रभावी नहीं रहेगा. इस निर्णय के तहत अब इस श्रेणी के तहत न तो कोई नया जाति प्रमाणपत्र जारी किया जाएगा और न ही वैधता प्रमाणपत्र दिए जाएंगे. साथ ही, इस संबंध में पहले जारी किए गए सभी आदेशों, परिपत्रों और अध्यादेशों को वापस ले लिया गया है.
कब और कैसे शुरू हुआ था ये आरक्षण?
सरकारी अधिकारियों के मुताबिक यह कोई नई नीति नहीं है, बल्कि अदालत के हस्तक्षेप के बाद उत्पन्न कानूनी स्थिति के अनुरूप प्रशासनिक व्यवस्था को दुरुस्त करना है. आपको बता दें कि यह आरक्षण जुलाई 2014 में तत्कालीन कांग्रेस-एनसीपी सरकार में अल्पसंख्यक कल्याण मंत्री नसीम खान के प्रस्ताव पर लाया गया था. हालांकि, इसके तुरंत बाद बॉम्बे हाई कोर्ट में इस पर याचिका दायर कर दी गई थी, जिसके चलते 14 नवंबर 2014 को कोर्ट ने सरकारी नौकरियों में इस आरक्षण पर अंतरिम रोक लगा दी थी.
चूंकि यह अध्यादेश कभी भी विधानसभा में पारित होकर कानून नहीं बन सका, इसलिए यह स्वतः ही समाप्त (लैप्स) हो गया था. सरकार का कहना है कि वर्ष 2014-15 के सभी संबंधित सरकारी आदेश अब कानूनी तौर पर अमान्य हो चुके हैं. सामान्य प्रशासन विभाग ने इन्हें औपचारिक रूप से रद्द कर दिया है, जिसे पुरानी कानूनी वास्तविकता को रिकॉर्ड में दर्ज करने के रूप में देखा जा रहा है.
राजनीतिक जानकारों का मानना है कि इस फैसले से राज्य में पिछड़ेपन की परिभाषा और अल्पसंख्यक कल्याण के मुद्दों पर एक नई बहस छिड़ सकती है. हालांकि यह कदम कानूनी अनिवार्यता बताया जा रहा है, लेकिन इसे मुस्लिम समुदाय के उन तबकों के लिए एक बड़ा झटका माना जा रहा है, जो लंबे समय से शिक्षा और रोजगार में बेहतर भागीदारी के लिए इस कोटे की मांग करते आ रहे थे.

