मनरेगा में बड़ा फर्जीवाड़ा: 20 मजदूर कर रहे काम, हाजिरी में दर्ज हो रहे 70 नाम
बलरामपुर की नानूहापुर पंचायत में लाखों के गबन का आरोप, BDO ने दिए जांच के आदेश
Sandesh Wahak Digital Desk: उत्तर प्रदेश के बलरामपुर जनपद के विकासखंड तुलसीपुर की ग्राम पंचायत नानूहापुर में मनरेगा कार्यों में बड़े पैमाने पर भ्रष्टाचार और फर्जीवाड़ा सामने आया है। ग्रामीणों ने ग्राम प्रधान और पंचायत सचिव पर लाखों रुपये के सरकारी धन के गबन का गंभीर आरोप लगाया है।
ग्रामीणों का कहना है कि मनरेगा के तहत काम करने वाले मजदूरों की वास्तविक संख्या कार्यस्थल पर केवल 20 से 25 रहती है, जबकि हाजिरी रजिस्टर में 50 से लेकर 70 मजदूरों के नाम दर्ज किए जाते हैं। ग्रामीणों का आरोप है कि यह फर्जी हाजिरी दिखाकर प्रधान और पंचायत सचिव सरकारी धन का दुरुपयोग कर रहे हैं।
मजदूरी में हिस्सा मांगने का आरोप
ग्रामीणों ने नाम न छापने की शर्त पर बताया कि यह फर्जीवाड़ा पिछले चार सालों से चल रहा है। आरोप है कि प्रधान और सचिव की मिलीभगत से मजदूरों के खाते में रकम आने के बाद उनसे कुछ हिस्सा वापस ले लिया जाता है, जिससे लाखों रुपये की धनराशि हड़प ली गई है।
ग्राम प्रधान शब्बीर से इस संबंध में बात करने पर उन्होंने गोलमोल जवाब देते हुए कहा कि “काम तो मेरे भाई देख रहे हैं।” इस पर ग्रामीणों ने सवाल उठाया है कि प्रधान की जिम्मेदारी उनके भाई कैसे देख सकते हैं। वहीं, पंचायत सचिव श्यामलाल ने फोन नहीं उठाया। ग्रामीणों का यह भी आरोप है कि सचिव छोटे-छोटे कामों के लिए भी रिश्वत मांगते हैं।
BDO ने दिए जांच के निर्देश
ग्रामीणों ने जिला प्रशासन से मामले की निष्पक्ष और सख्त जांच कर दोषियों पर कार्रवाई की मांग की है। इस गंभीर शिकायत पर खंड विकास अधिकारी (BDO) तुलसीपुर, सुनील आर्य ने संज्ञान लिया है। उन्होंने कहा कि शिकायत गंभीर है और मामले की जांच कराई जाएगी। BDO ने आश्वासन दिया कि जांच में दोषी पाए जाने पर कड़ी कार्रवाई की जाएगी और किसी भी स्तर पर भ्रष्टाचार बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। ग्रामीणों ने प्रशासन से जल्द कार्रवाई की मांग की है ताकि मनरेगा योजना का उद्देश्य प्रभावित न हो।
रिपोर्ट: योगेंद्र त्रिपाठी
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