बलरामपुर में आंगनबाड़ी केंद्रों के निर्माण में बड़ा घोटाला: घटिया सामग्री, अवैध बालू का इस्तेमाल; अधिकारी मौन

Sandesh Wahak Digital Desk: प्रदेश बलरामपुर जिले में बाल विकास परियोजना, 15वें राज्य वित्त और मनरेगा (महात्मा गांधी रोजगार गारंटी अधिनियम) जैसी महत्वपूर्ण योजनाओं के तहत बन रहे आंगनबाड़ी केंद्रों के निर्माण कार्यों में गंभीर अनियमितताएं सामने आई हैं। इन केंद्रों में, जहां छोटे बच्चों के लिए बाल वाटिकाएं चलनी हैं और गर्भवती महिलाओं को सुविधाएं मिलनी हैं, वहां मानकों की अनदेखी कर गुणवत्ताविहीन निर्माण कराया जा रहा है।

सन्देश वाहक न्यूज़‘ ने ग्राउंड जीरो पर पहुंचकर दो प्रमुख मामलों का जायजा लिया, जिसमें निर्माण सामग्री की गुणवत्ता सवालों के घेरे में है।

केस 1: ग्राम पंचायत गुगोली कला (लागत ₹11.80 लाख)

गुगोली कला में ₹11,80,000 की लागत से एक आंगनबाड़ी केंद्र का निर्माण हो रहा है, जिसमें दो कमरे, शौचालय और एक रसोईघर बनना है। निर्माण में घटिया माने जाने वाले पीले ईंटों का इस्तेमाल किया जा रहा है। सबसे बड़ी अनियमितता यह है कि निर्माण में नाले से अवैध खनन कर निकाले गए सफेद बालू का प्रयोग किया जा रहा है।

ग्रामीणों ने बताया कि निर्माण में इस्तेमाल हो रहे सरिया (आयरन रॉड) की गुणवत्ता भी मानक से कम है। केंद्र की छत पड़नी बाकी है, लेकिन नींव से ही निर्माण की गुणवत्ता सवालों के घेरे में है, जो भविष्य में इन इमारतों की सुरक्षा पर प्रश्नचिह्न लगाता है।

केस 2: हरैया सतघरवा ग्राम पंचायत, निद्धिपुरवा गांव

हरैया सतघरवा ग्राम पंचायत के निद्धिपुरवा गांव में बन रहे आंगनबाड़ी केंद्र में भी कमोबेश यही स्थिति है। मजदूरों ने खुलासा किया कि यहां भी निर्माण सामग्री के लिए जंगली नाले से अवैध खनन करवाकर बालू लाया जाता है, जिसमें ग्राम प्रधान की संलिप्तता बताई गई है।

तैनात राजमिस्त्री ने बताया कि निर्माण में 4 एमएम की जगह केवल 3 एमएम का सरिया इस्तेमाल किया गया है। चौंकाने वाली बात यह है कि निर्माण में किस ग्रेड के सीमेंट का उपयोग हो रहा है, इसकी जानकारी न तो राजमिस्त्री को है और न ही ठेकेदार को।

अधिकारियों का मौन: बड़ी लापरवाही की ओर इशारा

जब इस संबंध में जानकारी लेने के लिए जूनियर इंजीनियर को फ़ोन किया गया, तो उन्होंने कुछ भी कहने से इनकार कर दिया। वहीं, खंड विकास अधिकारी (BDO) पल्लवी सचान ने बार-बार फोन करने के बावजूद कॉल रिसीव नहीं की।

अधिकारियों का पक्ष न रखना यह स्पष्ट करता है कि ब्लॉक स्तर से लेकर जिला स्तर तक के अधिकारी इस अवैध बालू के उपयोग और गुणवत्ताहीन निर्माण के लिए जिम्मेदार नज़र आते हैं। अगर ऐसा नहीं होता तो वे अपना पक्ष स्पष्ट करते। जिले में बन रहे तीन दर्जन से अधिक आंगनबाड़ी केंद्रों में इस तरह की कोताही बरती जा रही है, जो भविष्य में छोटे बच्चों और महिलाओं के जीवन को खतरे में डाल सकती है।

रिपोर्ट: योगेंद्र त्रिपाठी

 

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