यूपी की सियासत में बड़ा उलटफेर, अखिलेश की ‘साइकिल’ पर सवार होंगे नसीमुद्दीन सिद्दीकी
Sandesh Wahak Digital Desk: उत्तर प्रदेश की राजनीति का एक बड़ा चेहरा और बहुजन समाज पार्टी के पूर्व दिग्गज नेता नसीमुद्दीन सिद्दीकी अब समाजवादी पार्टी (सपा) का दामन थामने जा रहे हैं। पिछले महीने कांग्रेस से इस्तीफा देने के बाद से ही उनके अगले कदम को लेकर कयास लगाए जा रहे थे, जिन पर अब विराम लगता नजर आ रहा है।
बसपा के ‘नंबर दो’ से सपा के ‘सिपाही’ तक
नसीमुद्दीन सिद्दीकी का राजनीतिक सफर काफी उतार-चढ़ाव भरा रहा है। मायावती सरकार के दौरान उन्हें पार्टी और सरकार में ‘नंबर दो’ की हैसियत हासिल थी। उस दौर में संगठन से लेकर सरकार के हर बड़े फैसले में उनका दखल रहता था। हालांकि, बसपा से अलग होने के बाद वे पिछले 8 सालों से कांग्रेस में थे, लेकिन वहां वे अपनी पुरानी धमक वापस नहीं पा सके।
क्यों छोड़ी कांग्रेस?
पिछले महीने जब उन्होंने कांग्रेस को अलविदा कहा, तो उन्होंने बड़े ही सलीके से अपनी बात रखी थी। उन्होंने कहा था “मुझे राहुल, प्रियंका या खड़गे जी से कोई नाराजगी नहीं है। मैं एक जमीनी कार्यकर्ता हूं, लेकिन कांग्रेस में पिछले 8 सालों से मुझे जमीन पर काम करने का मौका नहीं मिल पा रहा था। मीडिया विभाग का अध्यक्ष बनना या कमेटियों का सदस्य होना मेरे लिए जमीनी काम नहीं है।” नसीमुद्दीन का मानना है कि वे संगठन के आदमी हैं और वे उसी पार्टी में रहना चाहते हैं जहाँ उन्हें जनता के बीच जाकर काम करने का अवसर मिले।
अखिलेश यादव के लिए बढ़ेगी ताकत?
राजनीतिक जानकारों का मानना है कि नसीमुद्दीन सिद्दीकी के सपा में आने से अखिलेश यादव को मुस्लिम बेल्ट, खासकर पश्चिमी यूपी और बुंदेलखंड में मजबूती मिल सकती है। सिद्दीकी के पास संगठन चलाने का लंबा अनुभव है, जिसका फायदा सपा 2027 के विधानसभा चुनावों में उठाना चाहेगी।
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