मालदीव का उत्तरी चागोस समुद्री क्षेत्र पर दावा, अंतरराष्ट्रीय फैसले को चुनौती

Sandesh Wahak Digital Desk: मालदीव (Maldives) के रक्षा मंत्रालय ने एक बयान जारी करते हुए उत्तरी चागोस के समुद्री क्षेत्र पर कब्जा करने का दावा किया है। जबकि अंतर्राष्ट्रीय कोर्ट इस क्षेत्र को मॉरीशस का हिस्सा मान चुका है। मालदीव रिपब्लिक की एक रिपोर्ट में रक्षा मंत्रालय के हवाले से बताया गया है कि मालदीव ने उत्तरी चागोस इलाके के समुद्री क्षेत्र पर कंट्रोल कर लिया है। रक्षा मंत्रालय की ओर से दी गई यह जानकारी सीधे तौर पर इंटरनेशनल ट्रिब्यूनल फॉर द लॉ ऑफ द सी के फैसले को चुनौती देती है।

Maldives रक्षा मंत्रालय का बयान 

मालदीव (Maldives) रक्षा मंत्रालय ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर पोस्ट करते हुए बताया कि मालदीव नेशनल डिफेंस फोर्स के कोस्ट गार्ड जहाज धरमवंथा और एयर कॉर्प्स ड्रोन ने दक्षिणी विशेष आर्थिक क्षेत्र में विशेष निगरानी अभियान शुरू किया है। यह ऑपरेशन 4 फरवरी से शुरू किया गया और दक्षिणी बेसलाइन से 200 नॉटिकल मील तक फैला हुआ है। रक्षा मंत्रालय के अनुसार यह कार्रवाई संसद में 2026 के राष्ट्रपति के संबोधन के दौरान राष्ट्रपति मोहम्मद मुइज्जू की घोषणा के बाद शुरू की गई। बयान में कहा गया कि राज्य संविधान और राष्ट्रीय कानूनों के तहत परिभाषित मालदीव क्षेत्र में किसी भी बदलाव को मान्यता नहीं देगा।

रक्षा मंत्रालय ने मालदीव (Maldives) के संविधान के अनुच्छेद 115(d) का हवाला देते हुए कहा कि राष्ट्रपति देश की स्वतंत्रता और क्षेत्रीय अखंडता की रक्षा के लिए जिम्मेदार हैं। इसके साथ ही अनुच्छेद 243, सशस्त्र बल अधिनियम और मालदीव समुद्री क्षेत्र अधिनियम का भी उल्लेख किया गया। इन कानूनों को विशेष आर्थिक क्षेत्र सहित समुद्री क्षेत्रों की निरंतर सैन्य निगरानी और सुरक्षा का कानूनी आधार बताया गया। इससे पहले संसद के उद्घाटन सत्र में राष्ट्रपति मुइज्जू ने इस फैसले की घोषणा की थी।

Maldives का उत्तरी चागोस समुद्री क्षेत्र पर दावा, अंतरराष्ट्रीय फैसले को चुनौती

पिछली सरकार के फैसले को पलटने का दावा

राष्ट्रपति मुइज्जू ने कहा कि उनकी सरकार ने पूर्व राष्ट्रपति इब्राहिम मोहम्मद सोलिह की ओर से मॉरीशस के प्रधानमंत्री को भेजा गया चागोस द्वीपसमूह की संप्रभुता से जुड़ा पत्र वापस ले लिया है। उन्होंने कहा कि मालदीव मॉरीशस के साथ समुद्री सीमा को लेकर ITLOS के फैसले को चुनौती देगा। राष्ट्रपति के अनुसार यह फैसला कैबिनेट मंत्रियों और स्थानीय तथा अंतर्राष्ट्रीय कानूनी विशेषज्ञों से सलाह लेने के बाद किया गया। उन्होंने कहा कि विशेषज्ञों की राय के मुताबिक पिछली सरकार का पत्र राष्ट्रीय सुरक्षा और समुद्री क्षेत्र पर प्रतिकूल प्रभाव डाल रहा था।

ITLOS के फैसले के अनुसार मालदीव (Maldives) को करीब 92,563 वर्ग किलोमीटर विवादित समुद्री क्षेत्र मिला था। वहीं मालदीव का दावा है कि उसे अपने पहले के दावों की तुलना में करीब 45,331 वर्ग किलोमीटर क्षेत्र का नुकसान हुआ। राष्ट्रपति मुइज्जू ने कहा कि सरकार ट्रिब्यूनल द्वारा तय समुद्री सीमा को मान्यता नहीं देगी। उन्होंने कहा कि मालदीव के विशेष आर्थिक क्षेत्र की सीमाएं पहले से ही घरेलू कानून के तहत समुद्री क्षेत्र अधिनियम में तय की गई हैं।

2023 के फैसले के बाद बढ़ा राजनीतिक विवाद

अप्रैल 2023 में ITLOS ने दोनों देशों के बीच समुद्र में सीमा रेखा तय की थी। इस फैसले के बाद मालदीव (Maldives) में राजनीतिक विवाद बढ़ गया था। कई लोगों का मानना था कि इस फैसले से मालदीव ने अपने दक्षिणी समुद्री क्षेत्र का बड़ा हिस्सा खो दिया है, जिस पर वह पहले दावा करता था।

ब्रिटेन और अमेरिका से जुड़ा कूटनीतिक पहलू

राष्ट्रपति मुइज्जू ने कहा कि उनकी सरकार ने चागोस द्वीपसमूह मुद्दे पर ब्रिटिश सरकार से संपर्क किया है और दो पत्र भेजे हैं। इन पत्रों में मॉरीशस की तुलना में चागोस पर मालदीव (Maldives) के मजबूत दावे पर जोर दिया गया है। उन्होंने ब्रिटिश उप प्रधानमंत्री से टेलीफोन पर बातचीत होने की भी जानकारी दी, हालांकि ब्रिटिश सरकार की प्रतिक्रिया का खुलासा नहीं किया गया।

राष्ट्रपति मुइज्जू ने यह भी कहा था कि अगर चागोस द्वीपसमूह पर मालदीव (Maldives) का नियंत्रण हो जाता है तो वह अमेरिका को यहां सैन्य अड्डा बनाए रखने की अनुमति दे सकता है। वहीं इस द्वीपसमूह पर मॉरीशस की संप्रभुता मानी जाती है और ब्रिटेन ने पिछले साल एक समझौते के तहत इसकी संप्रभुता मॉरीशस को सौंप दी थी।

 

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