मालेगांव ब्लास्ट केस: मोहन भागवत को गिरफ्तार करने का आदेश था, पूर्व ATS अधिकारी का सनसनीखेज दावा
Sandesh Wahak Digital Desk: महाराष्ट्र के मालेगांव में 29 सितंबर 2008 को हुए बम धमाके के मामले में गुरुवार को NIA की विशेष अदालत ने बड़ा फैसला सुनाते हुए साध्वी प्रज्ञा सिंह ठाकुर और कर्नल श्रीकांत पुरोहित सहित सभी सात आरोपियों को बरी कर दिया। इस धमाके में छह लोगों की मौत हो गई थी, जबकि 101 से ज्यादा लोग घायल हुए थे। अदालत का यह फैसला 17 साल लंबे इंतजार के बाद आया है, जिसके बाद पूरे देश में चर्चा तेज हो गई है।
पूर्व ATS अधिकारी का बड़ा दावा
इस फैसले के बाद महाराष्ट्र आतंकवाद रोधी दस्ते (ATS) में कार्यरत रहे पूर्व पुलिस अधिकारी महबूब मुजावर ने सनसनीखेज खुलासा किया। मुजावर ने दावा किया कि जांच के दौरान उन्हें राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (RSS) के प्रमुख मोहन भागवत को गिरफ्तार करने का आदेश दिया गया था। उनका कहना है कि यह आदेश ‘भगवा आतंकवाद’ को साबित करने की साजिश का हिस्सा था।
मुजावर ने कहा, मुझे मोहन भागवत जैसी बड़ी हस्ती को गिरफ्तार करने का गुप्त आदेश मिला, लेकिन मैंने ऐसा नहीं किया क्योंकि मुझे सच्चाई पता थी। आदेश का पालन न करने के कारण मेरे खिलाफ झूठा मामला दर्ज किया गया, जिसने मेरे 40 साल के करियर को खत्म कर दिया।”
‘फर्जी जांच’ का आरोप
मुजावर ने आरोप लगाया कि इस केस की शुरुआती जांच ATS ने की थी और उसमें कई तरह के फर्जीवाड़े किए गए। बाद में जब जांच NIA के पास गई तो सच्चाई सामने आई और कोर्ट ने सभी आरोपियों को बरी कर दिया। मुजावर ने कहा कि मालेगांव ब्लास्ट को लेकर जिस ‘भगवा आतंकवाद’ की कहानी बनाई गई थी, वह पूरी तरह से फर्जी थी।
कोर्ट का फैसला और राजनीतिक हलचल
NIA कोर्ट के इस फैसले के बाद राजनीतिक हलचल तेज हो गई है। साध्वी प्रज्ञा ठाकुर और अन्य आरोपियों के खिलाफ लगाए गए आरोप पूरी तरह से हट गए हैं। फैसले के बाद अब सवाल उठ रहे हैं कि आखिर 17 साल तक चली इस जांच और मुकदमे में हुई देरी और राजनीतिक एंगल पर कब जवाबदेही तय होगी।
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