Malegaon blast: सभी आरोपियों के बरी होने से पीड़ित परिवार मायूस, बोले- सुप्रीम कोर्ट जाएंगे
Malegaon blast: 2008 मालेगांव बम धमाकों से जुड़े बहुचर्चित मामले में 17 साल की लंबी कानूनी लड़ाई के बाद गुरुवार को राष्ट्रीय जांच एजेंसी (एनआईए) की विशेष अदालत ने अपना फैसला सुनाया। कोर्ट ने सबूतों के अभाव में सभी सातों आरोपियों को बरी कर दिया। हालाँकि, इस फैसले ने पीड़ित परिवारों और स्थानीय लोगों को गहरा सदमा पहुँचाया है। उन्होंने इसे न्याय नहीं, बल्कि एक बड़ी नाइंसाफी बताया है और अब सुप्रीम कोर्ट का दरवाजा खटखटाने का ऐलान किया है।
हेमंत करकरे की उम्मीद की किरण धुंधली हुई: मौलाना कय्यूम कासमी
कोर्ट के फैसले पर अपनी निराशा व्यक्त करते हुए मौलाना कय्यूम कासमी ने कहा, हमें जो उम्मीद थी, उस तरह से फैसला नहीं आया। हेमंत करकरे ने जो उम्मीद की किरण दिखाई थी, वो हमारे पक्ष में नहीं आई। मालेगांव के पीड़ित गरीब और मजलूम हैं, लेकिन उनके हक में फैसला नहीं आया। हम अब सुप्रीम कोर्ट जाएंगे।

मौलाना कासमी ने आगे कहा, आज का फैसला मालेगांव के लिए मायूसी लेकर आया है। अदालतों पर जो भरोसा था, उसमें भी लोगों के बीच कमी महसूस हो रही है। यह फैसला पंचनामा तैयार करने वालों की गलती का नतीजा है। कई मामलों में आरोपियों को सिर्फ कागजी कमियों के कारण छोड़ दिया गया है। हम मानते हैं कि हुकूमत और अदालतों पर दबाव था, जिससे हमें इंसाफ नहीं मिला।
न्याय के लिए लड़ेंगे: पीड़ितों के परिजन
एक पीड़ित के पिता लियाकत शेख ने भी फैसले पर कड़ी नाराजगी जताते हुए कहा, हमारे साथ गलत हुआ है। दोषियों को सजा मिलनी चाहिए थी। उन्हें सबूतों के साथ पकड़ा गया था। यह सरासर नाइंसाफी है। अब हम सुप्रीम कोर्ट का रुख करेंगे।
एक अन्य पीड़ित के पिता ने कहा कि 17 साल के बाद कोर्ट का यह फैसला हमारे लिए चौंकाने वाला है। उन्होंने कहा, हमें इंसाफ नहीं मिला है। हम सुप्रीम कोर्ट जाएंगे। हर हाल में हमें न्याय चाहिए। परिवार के एक सदस्य ने भी दोहराया कि आज कोर्ट का जो फैसला आया है, वह न्याय नहीं है और वे इंसाफ के लिए सुप्रीम कोर्ट जाएंगे।
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