SIR के खिलाफ Mamata Banerjee का अनोखा प्रदर्शन, ड्राइंग बनाकर जताया विरोध
Sandesh Wahak Digital Desk: पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी (Mamata Banerjee) का स्पेशल इंटेंसिव रिवीजन (SIR) के खिलाफ विरोध प्रदर्शन मंगलवार को भी जारी रहा। वोटर लिस्ट में कथित गड़बड़ियों को लेकर चल रहे इस धरने का यह पांचवां दिन था। सेंट्रल कोलकाता के मेट्रो चैनल में आयोजित इस धरने के दौरान ममता बनर्जी ने चुनाव आयोग के खिलाफ अनोखे अंदाज में अपना विरोध जताया और सांकेतिक तरीके से वोटरों के नाम गायब होने का मुद्दा उठाया।
ड्राइंग के जरिए जताया विरोध
यहां धरने के मंच पर ममता बनर्जी (Mamata Banerjee) ने एक स्टैंड पर रखे हरे रंग के ड्राइंग बोर्ड पर रंगों से चित्र बनाकर अपना विरोध दर्ज कराया। उन्होंने बोर्ड के ऊपर “SIR” लिखा और बीच में सफेद रंग से “गायब” शब्द लिखकर वोटर लिस्ट से नाम हटाए जाने का प्रतीकात्मक संदेश दिया। इसके बाद उन्होंने कई छोटे टेढ़े-मेढ़े गोले और एक बड़े नक्शे जैसी आउटलाइन बनाई। धीरे-धीरे उन्होंने बोर्ड के कुछ हिस्सों को सफेद रंग से रंग दिया, जो कथित तौर पर वोटरों के नाम हटाए जाने का संकेत था। इस दौरान ममता बनर्जी शांत भाव से ड्राइंग बनाती रहीं। इसी समय मुख्य चुनाव आयुक्त की ओर से प्रेस कॉन्फ्रेंस भी की जा रही थी।
6 मार्च से जारी है विरोध प्रदर्शन
आपको बताते चलें कि ममता बनर्जी (Mamata Banerjee) 6 मार्च से SIR प्रक्रिया के खिलाफ धरना दे रही हैं। उनका आरोप है कि इलेक्शन कमीशन ऑफ इंडिया की इस प्रक्रिया के कारण 2026 के विधानसभा चुनाव से पहले राज्य में बड़े पैमाने पर असली वोटरों के नाम वोटर लिस्ट से हटाए जा रहे हैं। पिछले कुछ दिनों में तृणमूल कांग्रेस सुप्रीमो ने कई बार चुनाव आयोग पर भाजपा के इशारों पर काम करने और पश्चिम बंगाल में वास्तविक वोटरों को मतदान से रोकने की कोशिश करने का आरोप लगाया है।
SIR मामले में सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई
दरअसल पश्चिम बंगाल में SIR प्रक्रिया को चुनौती देते हुए ममता बनर्जी (Mamata Banerjee) और अन्य तृणमूल कांग्रेस सांसदों की याचिका पर सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई भी हुई है। सुनवाई के दौरान अदालत ने निर्देश दिया कि चुनाव आयोग हाईकोर्ट के चीफ जस्टिस से सलाह लेकर एक नोटिफिकेशन जारी करे। इसके तहत एक पूर्व मुख्य न्यायाधीश और अन्य जजों को शामिल करते हुए एक अपीलेट ट्रिब्यूनल का गठन किया जाएगा। यह ट्रिब्यूनल उन अपीलों की सुनवाई करेगा जिनकी अर्जी ज्यूडिशियल ऑफिसर खारिज कर रहे हैं।
जिस दौरान सुप्रीम कोर्ट ने यह भी कहा कि जिन मामलों में ज्यूडिशियल ऑफिसर अर्जी को खारिज करेंगे, उसका कारण भी स्पष्ट रूप से बताना होगा। इस ट्रिब्यूनल का खर्च चुनाव आयोग वहन करेगा। राज्य सरकार की ओर से पेश वकील मेनका गुरुस्वामी ने अदालत को बताया कि ज्यूडिशियल ऑफिसर्स अब तक लगभग 7 लाख मामलों की प्रक्रिया पूरी कर चुके हैं। कुल मामलों की संख्या करीब 63 लाख है, जिनमें से लगभग 57 लाख मामले अभी भी लंबित हैं।
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