मौलाना आज़ाद: शिक्षा और लोकतंत्र के अडिग स्तंभ, लखनऊ में संगोष्ठी के जरिए विकसित भारत का खाका तैयार
Sandesh Wahak Digital Desk: देश के प्रथम शिक्षा मंत्री मौलाना अबुल कलाम आज़ाद की 68वीं पुण्यतिथि के अवसर पर लखनऊ के बिजनौर रोड स्थित मौलाना आज़ाद मेमोरियल अकादमी में एक विशेष संगोष्ठी का आयोजन किया गया। शिक्षा, लोकतंत्र और सामाजिक न्याय-विकसित भारत 2047 के संदर्भ में विषय पर आधारित इस कार्यक्रम में शिक्षाविदों ने मौलाना आज़ाद के विचारों को आज के समय में और भी प्रासंगिक बताया।

मौलाना आज़ाद सामाजिक न्याय की मिसाल
मुख्य अतिथि और रांची विश्वविद्यालय के पूर्व विभागाध्यक्ष प्रोफेसर जमशीद कमर ने अपने संबोधन में कहा कि मौलाना आज़ाद केवल एक नेता नहीं, बल्कि शिक्षा और सामाजिक न्याय की एक मुकम्मल मिसाल थे। उन्होंने जोर देकर कहा कि किसी भी देश की असली तरक्की वहां की वैचारिक स्वतंत्रता और सामाजिक समानता से तय होती है। हमें मौलाना आज़ाद के मूल्यों को अपनी जीवनशैली और शिक्षा व्यवस्था में शामिल करना चाहिए।

प्रमुख वक्ताओं के विचार
डॉ. अब्दुल कुद्दूस हाशमी (अकादमी सचिव) ने युवाओं से ज्ञान और नैतिकता के साथ जिम्मेदार नागरिक बनने की अपील की। उन्होंने कहा कि शिक्षा ही राष्ट्रीय जागरूकता की असली नींव है।
प्रोफेसर सोफिया अहमद (अंबेडकर विश्वविद्यालय) ने संवैधानिक मूल्यों पर चर्चा करते हुए कहा कि एक शिक्षित नागरिक ही लोकतंत्र की असली ताकत होता है।
प्रो. रुद्रप्रसाद साहू ने वंचित और पिछड़े वर्गों को समान अवसर देने की बात कही, तभी विकास को सार्थक माना जा सकता है।
प्रोफेसर सफिया लोखंडे ने राष्ट्रीय विकास के लिए महिलाओं की शिक्षा और उनकी सामाजिक भागीदारी को सबसे महत्वपूर्ण स्तंभ बताया।

फोटो प्रदर्शनी और सम्मान समारोह
इस खास मौके पर मौलाना आज़ाद के जीवन और उनके महान योगदानों को दर्शाती एक फोटो प्रदर्शनी भी लगाई गई, जिसे छात्रों और अतिथियों ने खूब सराहा। साथ ही, विभिन्न शैक्षिक और साहित्यिक प्रतियोगिताओं में अव्वल आने वाले छात्र-छात्राओं को नकद पुरस्कार और प्रमाणपत्र देकर सम्मानित किया गया।
अनुशासन और एकता पर जोर
कार्यक्रम की अध्यक्षता कर रहे सेवानिवृत्त ग्रुप कैप्टन दिनेश चंद्र ने सशक्त राष्ट्र निर्माण के लिए अनुशासन और राष्ट्रीय एकता को अनिवार्य बताया। अंत में अकादमी के अध्यक्ष शारिक अलवी ने सभी का आभार व्यक्त करते हुए संकल्प लिया कि ‘विकसित भारत 2047’ के लक्ष्य को पाने के लिए अकादमी शिक्षा और न्याय के मूल्यों को बढ़ावा देना जारी रखेगी।
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