‘सामंती तत्वों के खिलाफ सख्ती जरूरी’, मायावती ने UP और MP सहित अन्य राज्यों की सरकारों को घेरा
Sandesh Wahak Digital Desk: उत्तर प्रदेश में दलित समुदाय के साथ हुई दो हालिया अमानवीय और हिंसक घटनाओं पर बहुजन समाज पार्टी (बसपा) की प्रमुख मायावती ने गहरी चिंता व्यक्त की है और राज्य सरकारों से सख्त कार्रवाई की मांग की है।
लखनऊ में अमानवीय कृत्य
लखनऊ के काकोरी थाना क्षेत्र में स्थित शीतला माता मंदिर के पास 60 वर्षीय दलित बुजुर्ग रामपाल रावत के साथ अमानवीय व्यवहार किया गया। रामपाल ने आरोप लगाया कि सोमवार शाम मंदिर परिसर में पानी गिरने की घटना को पेशाब करने का आरोप लगाते हुए स्वामी कांत उर्फ पम्मू नामक व्यक्ति ने उन्हें जातिसूचक गालियाँ दीं और जबरन ज़मीन (पेशाब) चाटने के लिए मजबूर किया। इस घटना से हड़कंप मच गया, जिसके बाद पुलिस ने त्वरित कार्रवाई करते हुए आरोपी पम्मू को गिरफ्तार कर लिया है।
यू.पी. के जिला प्रयागराज के थाना धूमनगंज अन्तर्गत मुण्डेरा चुंगी के पास दो पक्षों में मामूली बात को लेकर कहासुनी में एक दलित व्यक्ति की नृशंस हत्या की घटना तथा राजधानी लखनऊ में पेशाब आदि जैसी घटनाएं मीडिया में चर्चा में हैं।
उत्तर प्रदेश व मध्य प्रदेश सहित देश के अन्य राज्यों…— Mayawati (@Mayawati) October 22, 2025
प्रयागराज में दलित युवक की हत्या
दूसरी घटना प्रयागराज के धूमनगंज थाना क्षेत्र के मुंडेरा चुंगी के पास हुई। सोमवार को 40 वर्षीय दलित युवक रवींद्र पासी की दूसरे समुदाय के लोगों के साथ मामूली कहासुनी के बाद ईंट-पत्थर से पीटकर नृशंस हत्या कर दी गई। जख्मी हालत में रवींद्र को अस्पताल ले जाया गया, जहाँ इलाज के दौरान उनकी मौत हो गई।
मायावती की प्रतिक्रिया
पूर्व मुख्यमंत्री मायावती ने सोशल मीडिया ‘एक्स’ पर इन दोनों घटनाओं पर अपनी प्रतिक्रिया दी। उन्होंने लिखा “यू.पी. के जिला प्रयागराज के थाना धूमनगंज अन्तर्गत मुण्डेरा चुंगी के पास दो पक्षों में मामूली बात को लेकर कहासुनी में एक दलित व्यक्ति की नृशंस हत्या की घटना तथा राजधानी लखनऊ में पेशाब आदि जैसी घटनाएं मीडिया में चर्चा में हैं। उत्तर प्रदेश व मध्य प्रदेश सहित देश के अन्य राज्यों में भी होने वाली ऐसी अमानवीय घटनाएं अति-निन्दनीय व चिन्तनीय।”
मायावती ने मांग की कि “ऐसे बेलगाम हो रहे आपराधिक, अराजक व सामंती तत्वों के खिलाफ उत्तर प्रदेश तथा अन्य राज्यों की सरकारें सख़्त कार्रवाई करके अपने-अपने राज्यों में क़ानून के राज को ज़रूर स्थापित करें ताकि इस प्रकार की शर्मनाक व हिंसक घटनाओं की बढ़ती प्रवृति पर रोक लग सके।”
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