त्योहारों और आस्था में राजनेताओं का दखल बढ़ा रहा है तनाव, मायावती बोलीं- धर्म और राजनीति को अलग रखना ही बेहतर

Lucknow News: बहुजन समाज पार्टी (बसपा) की प्रमुख मायावती ने शनिवार को देश के मौजूदा हालात पर तीखी टिप्पणी की। उन्होंने कहा कि पिछले कुछ वर्षों से धार्मिक आयोजनों, त्योहारों और पूजा-पाठ में राजनीतिक हस्तक्षेप काफी बढ़ गया है। मायावती के मुताबिक, राजनेताओं का यह प्रभाव समाज में नए विवादों और संघर्षों को जन्म दे रहा है, जो लोकतंत्र और सामाजिक शांति के लिए ठीक नहीं है।

प्रयागराज विवाद पर जताई चिंता

मायावती ने प्रयागराज के माघ मेले में मौनी अमावस्या के स्नान को लेकर चल रहे विवाद का जिक्र करते हुए इसे संकीर्ण राजनीति का नतीजा बताया। उन्होंने कहा, प्रयागराज में स्नान को लेकर जो आरोप-प्रत्यारोप और अनादर का माहौल बना है, वह धर्म को राजनीति से जोड़ने का ही खतरा है। उन्होंने अपील की कि इस कड़वे विवाद को आपसी सहमति से जल्द से जल्द सुलझा लिया जाए ताकि आस्था का पर्व राजनीति की भेंट न चढ़े।

संविधान और राष्ट्रीय धर्म की दिलाई याद

सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ‘X’ पर लिखते हुए मायावती ने नेताओं को उनके संवैधानिक दायित्वों की याद दिलाई। संविधान के अनुसार जनहित और जनकल्याण ही ‘वास्तविक राष्ट्रीय धर्म’ है। राजनीति को धर्म से और धर्म को राजनीति से दूर रखना चाहिए ताकि राजनेता बिना किसी भेदभाव या पक्षपात के सर्वसमाज के लिए काम कर सकें।

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