स्कूलों का मर्जर और RTE में सख्ती: शिक्षा व्यवस्था में बड़ा बदलाव, 1 जुलाई से लागू होंगी नई व्यवस्थाएं

Sandesh Wahak Digital Desk :  उत्तर प्रदेश में अब शिक्षा के क्षेत्र में लापरवाही और मनमानी नहीं चलेगी। सरकार ने 1 जुलाई से राज्यभर में बड़ी और असरदार व्यवस्था लागू करने का फैसला किया है। जहां एक ओर संसाधनों के बेहतर इस्तेमाल के लिए छोटे स्कूलों का मर्जर किया जा रहा है, वहीं दूसरी ओर RTE (निःशुल्क शिक्षा अधिकार अधिनियम) के दुरुपयोग पर सख्त कार्रवाई शुरू हो गई है।

कोई भी स्कूल बंद नहीं किया जा रहा है

राजधानी लखनऊ सहित प्रदेश के विभिन्न जिलों में उन स्कूलों को चिन्हित किया गया है, जहां छात्रों की संख्या 30 से भी कम है। अब ऐसे स्कूलों को पास के अच्छे स्कूलों में पेयर किया जा रहा है। इसे पेयरिंग प्रक्रिया कहा गया है।  शासन ने साफ किया है कि कोई भी स्कूल बंद नहीं किया जा रहा है। बच्चों को सिर्फ बेहतर सुविधाओं और माहौल वाले स्कूलों में स्थानांतरित किया जा रहा है।

रिपेयरिंग भीम मॉडल के तहत स्कूलों में सुधार

सरकार ने यह भी निर्देश दिए हैं कि जिन स्कूलों को पेयर किया गया है, वहां जरूरी मरम्मत, रंगाई-पुताई, साफ-सफाई और आधारभूत सुविधाओं को बेहतर किया जाए। इस योजना को “रिपेयरिंग भीम मॉडल” नाम दिया गया है। इसके तहत ग्राम प्रधान, स्कूल टीचर्स और BEO स्तर पर बच्चों और अभिभावकों को वीडियो और ऑडियो संदेशों के माध्यम से जागरूक किया जा रहा है।

RTE में लापरवाही पर सरकार का बड़ा एक्शन

RTE के तहत गरीब और कमजोर वर्ग के बच्चों को निजी स्कूलों में मुफ्त शिक्षा देने का प्रावधान है, लेकिन कई स्कूलों ने या तो दाखिला देने से इनकार कर दिया या अभिभावकों से पैसे मांगे।

बीएसए राम प्रवेश ने कहा कि:

“RTE के तहत चयनित बच्चों को हर हाल में 1 जुलाई से स्कूल में पढ़ाई शुरू करनी है। जो स्कूल नियम तोड़ेंगे, उनके खिलाफ FIR और मान्यता रद्द जैसी कार्रवाई की जाएगी।”

 हमारी जो पेयरिंग नीति है, उसमें कोई भी स्कूल बंद नहीं किया जा रहा है। बच्चों को नजदीकी स्कूलों में स्थानांतरित किया जा रहा है।”

“जो स्कूल आरटीई के तहत बच्चों को दाखिला नहीं दे रहे हैं या अभिभावकों से पैसे मांग रहे हैं, उनके खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाएगी।”

“मनमानी करने वाले स्कूल अब नहीं बचेंगे। हमने ऐसे कई स्कूलों को नोटिस भेजा है और FIR की भी तैयारी है।”

“चर्चित स्कूल भी इस जांच के दायरे में हैं। नियमों का पालन न करने वालों को किसी भी कीमत पर नहीं छोड़ा जाएगा।”

“ग्राम प्रधानों, शिक्षकों और शिक्षा अधिकारियों के माध्यम से पूरे जिले में जागरूकता अभियान चलाया जा रहा है।”

अब तक 3000 से अधिक बच्चे दाखिले से वंचित हैं, लेकिन प्रशासन ने भरोसा दिलाया है कि जल्द सभी को दाखिला दिलाया जाएगा।

नामी स्कूलों को भी भेजा गया नोटिस

जिन नामी और चर्चित स्कूलों ने RTE के नियमों का पालन नहीं किया, उन्हें नोटिस भेजा गया है। कुछ स्कूलों पर ग्राम प्रधानों द्वारा अनुचित फायदा पहुंचाने के आरोप भी सामने आए हैं। शासन ने इन मामलों की जांच के आदेश दे दिए हैं।

ग्राम प्रधानों की अहम भूमिका

ग्राम स्तर पर प्रधानों और पंचायतों ने भी बड़ी भूमिका निभाई है। वे घर-घर जाकर अभिभावकों को समझा रहे हैं कि किस स्कूल में जाना है, क्या अधिकार हैं और मुफ्त शिक्षा पाने की प्रक्रिया क्या है।

इससे भ्रम की स्थिति काफी हद तक साफ हो रही है और बच्चों को सही स्कूल तक पहुंचाने में मदद मिल रही है।

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