मिशन 2027: भाजपा का लखनऊ ‘नो एंट्री’ जोन! 6 फरवरी तक नेताओं के दौरों पर ब्रेक, जानें क्यों मचा है हड़कंप

Sandesh Wahak Digital Desk: उत्तर प्रदेश भाजपा के गलियारों में इन दिनों एक अजीब सा सन्नाटा है। पार्टी के प्रदेश मुख्यालय पर जो कभी नेताओं और कार्यकर्ताओं की भीड़ से गुलजार रहता था, वहां अब बाहरी लोगों के लिए ‘नो एंट्री’ का बोर्ड लगा दिया गया है। पार्टी हाईकमान ने साफ निर्देश दिए हैं कि 6 फरवरी तक कोई भी नेता, विधायक या पदाधिकारी अपना चेहरा चमकाने लखनऊ न आए।

जो नेता नियम तोड़कर दफ्तर पहुंच रहे हैं, उन्हें संगठन की नाराजगी और फटकार का सामना करना पड़ रहा है। यहां तक कि विधानसभा और विधान परिषद की सभी कमेटियों की बैठकें और दौरे भी 6 फरवरी तक के लिए रद्द कर दिए गए हैं।

आखिर क्यों लखनऊ आने पर लगी है रोक?

पार्टी की इस सख्ती के पीछे सबसे बड़ी वजह है गहन मतदाता पुनरीक्षण (एसआईआर) अभियान। भाजपा इस समय अपनी पूरी ताकत नए वोटर बनाने और वोटर लिस्ट को दुरुस्त करने में लगा रही है। प्रदेश मुख्यालय को एक हाई-टेक ‘वार रूम’ में तब्दील कर दिया गया है। यहां वालंटियरों की एक बड़ी टीम तैनात है जो प्रदेश की सभी 403 विधानसभा सीटों की पल-पल की रिपोर्ट ले रही है। संगठन ने सभी विधायकों और विधान परिषद सदस्यों (MLCs) को सख्त हिदायत दी है कि वे लखनऊ में समय बर्बाद करने के बजाय अपने-अपने क्षेत्रों में ‘डेरा’ डालें।

सुस्त रफ्तार पर सीधे पहुंच रहे फोन

संगठन महामंत्री धर्मपाल सिंह खुद इस पूरे अभियान की मॉनिटरिंग कर रहे हैं। जिन विधानसभा क्षेत्रों में नए मतदाता बनाने की रफ्तार धीमी है, वहां के विधायकों और संभावित दावेदारों को सीधे फोन जा रहे हैं। उनसे पूछा जा रहा है कि काम धीमा क्यों है और उन्हें तब तक क्षेत्र न छोड़ने को कहा गया है जब तक लक्ष्य पूरा न हो जाए।

36 लाख नए वोटर, लक्ष्य अभी और बड़ा

पार्टी सूत्रों के मुताबिक, इस सख्ती का असर भी दिखने लगा है। पिछले दो-तीन दिनों में नए वोटर बनाने के काम में जबरदस्त तेजी आई है। प्रदेश में अब तक 36 लाख से अधिक नए वोटर बनाए जा चुके हैं। एसआईआर अभियान की अंतिम तिथि 6 फरवरी है, इसीलिए तब तक सभी बैठकों और गैर-जरूरी दौरों पर पाबंदी लगाई गई है ताकि पूरा ध्यान केवल जमीनी काम पर रहे।

भाजपा का यह कदम साफ संदेश देता है कि वह आगामी चुनावों के लिए कोई भी कोर-कसर बाकी नहीं छोड़ना चाहती। लखनऊ में जमावड़ा करने के बजाय कार्यकर्ताओं को ‘बूथ’ पर पसीना बहाने का आदेश देकर पार्टी ने अपनी चुनावी मशीनरी को पूरी तरह एक्टिव कर दिया है।

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