मोहन भागवत ने वेटरिनरी डॉक्टरों को बताया पॉलिसी मेकर, बोले- भावनाओं से नहीं ज्ञान से निकले समाधान

Sandesh Wahak Digital Desk: आरएसएस सरसंघचालक मोहन भागवत गुरुवार को एक अलग अंदाज में नजर आए। नागपुर के उसी वेटरिनरी कॉलेज में, जहाँ से उन्होंने कभी पढ़ाई की थी, भागवत ने ‘इंडियन सोसायटी फॉर एडवांसमेंट ऑफ कैनाइन प्रैक्टिस’ के वार्षिक अधिवेशन में मुख्य अतिथि के रूप में शिरकत की। यहाँ उन्होंने न केवल एक अलग ‘वेटरिनरी काउंसिल’ के गठन की मांग की, बल्कि वेटरिनरी डॉक्टरों को समाज के नीति-निर्माण में शामिल करने पर भी जोर दिया।

अपने संबोधन की शुरुआत करते हुए भागवत थोड़े भावुक और चुटीले अंदाज में बोले, मैंने इसी कॉलेज में पढ़ाई की है। हालांकि मुझे इस क्षेत्र को छोड़े 50 साल हो गए हैं। ऐसा नहीं है कि मुझे कुछ याद नहीं, लेकिन अब आप लोगों जितना ज्ञान मेरे पास नहीं है। उन्होंने पूर्व छात्र के रूप में खुद को बुलाए जाने पर आभार व्यक्त किया।

दिल्ली में लावारिस कुत्तों (Stray Dogs) को लेकर चल रही बहस पर भागवत ने बहुत ही व्यावहारिक बात कही। उन्होंने कहा, आजकल बहस दो छोरों पर बंट गई है, एक कहता है सबको मार डालो, दूसरा कहता है छुओ भी मत। भागवत ने कहा कि इंसानों और कुत्तों को साथ रहना है, तो रास्ता नसबंदी और वैज्ञानिक तरीकों से निकालना होगा। यह मुद्दा भावनाओं का नहीं, बल्कि ज्ञान और समाधान का है।

अलग वेटरिनरी काउंसिल की जरूरत

भागवत ने संस्थागत सुधारों पर जोर देते हुए कहा कि जैसे खेलों के फैसले खिलाड़ी लेते हैं, वैसे ही जानवरों और जनसुरक्षा से जुड़े निर्णय वेटरिनरी डॉक्टरों और विशेषज्ञों के मार्गदर्शन में ही होने चाहिए। उन्होंने स्पष्ट शब्दों में कहा, पशु चिकित्सा से जुड़े निर्णयों के लिए एक अलग और सशक्त वेटरिनरी काउंसिल होनी चाहिए। मेरा दृढ़ विश्वास है कि जानवरों को समझने वाले विशेषज्ञ ही इस क्षेत्र की नीतियां तय करें।

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