सहारा सिटी पर नगर निगम का कब्जा: 2480 करोड़ की संपत्ति को लेकर हाईकोर्ट में आज सुनवाई
Sandesh Wahak Digital Desk: राजधानी की बहुचर्चित सहारा सिटी (गोमती नगर) पर लखनऊ नगर निगम ने कब्जा कर लिया है, जिसके खिलाफ सहारा प्रबंधन ने हाईकोर्ट का दरवाजा खटखटाया है। इस महत्वपूर्ण मामले पर आज, 8 अक्टूबर को न्यायमूर्ति संगीता चंद्रा और न्यायमूर्ति अमिताभ कुमार राय की खंडपीठ के समक्ष सुनवाई होनी है।
क्या है सहारा का आरोप?
सहारा ने नगर निगम द्वारा 8 और 11 सितंबर 2025 को जारी किए गए कब्जा आदेशों को रद्द करने की मांग करते हुए हाईकोर्ट में याचिका दायर की है। कंपनी का कहना है कि नगर निगम की इस कार्रवाई को सिविल कोर्ट के स्थगन आदेश और आर्बिट्रेशन की कार्यवाही में लीज एग्रीमेंट बढ़ाने के निर्देशों के बावजूद चुनौती दी गई है। सहारा ने यह भी आरोप लगाया कि कार्रवाई से पहले उसे सुनवाई का उचित अवसर नहीं दिया गया।
याचिका के अनुसार, नगर निगम ने 1994 और 1995 में गोमती नगर में सहारा को जमीन पट्टे पर दी थी। सहारा ने इन 170 एकड़ ज़मीनों पर 2480 करोड़ रुपये की लागत से 87 आवासीय और वाणिज्यिक संपत्तियां विकसित की हैं।
27 साल पुराना विवाद और पट्टे की शर्तें
नगर निगम ने 130 एकड़ जमीन आवासीय योजना और 40 एकड़ ग्रीन बेल्ट विकसित करने के लिए सहारा हाउसिंग कंपनी को 30 साल की लीज पर दी थी। हालांकि, लीज मिलने के तीन साल बाद ही कानूनी विवाद शुरू हो गया था, जो 27 साल तक चलता रहा।
विवाद तब शुरू हुआ जब तत्कालीन नगर आयुक्त दिवाकर त्रिपाठी ने लीज शर्तों के उल्लंघन का हवाला देते हुए पट्टे को निरस्त करने का नोटिस जारी कर दिया था। इस विवाद के कारण आवासीय योजना कभी पूरी नहीं हो पाई और नगर निगम को करोड़ों का लीज रेंट भी नहीं मिला। लीज की अवधि पूरी होने के बाद, नगर निगम ने अब इस जमीन पर औपचारिक रूप से कब्जा ले लिया है।
नई विधानसभा के लिए ज़मीन की अटकलें
सहारा सिटी की जमीन पर कब्जे के बाद अब इसके भविष्य को लेकर अटकलें तेज हो गई हैं। सूत्रों के अनुसार, राज्य सरकार लंबे समय से नई विधानसभा भवन के लिए करीब 200 एकड़ जमीन की तलाश कर रही है। ऐसे में, नगर निगम की 170 एकड़ और एलडीए की 75 एकड़ जमीन को मिलाकर यहाँ लगभग 245 एकड़ का क्षेत्र उपलब्ध हो सकता है, जो लोकेशन और आवागमन दोनों के लिहाज से उपयुक्त माना जा रहा है।

