National Sports Governance Bill: खेलों में बड़े बदलाव की तैयारी, खिलाड़ियों को मिलेगी ज्यादा ताकत
Sandesh Wahak Digital Desk: भारत में खेलों के संचालन, पारदर्शिता और जवाबदेही सुनिश्चित करने के उद्देश्य से सरकार ने बुधवार को ‘राष्ट्रीय खेल प्रशासन विधेयक 2024 (National Sports Governance Bill)’ लोकसभा में पेश किया।
यह विधेयक देश के खेल संघों और खिलाड़ियों के बीच विवादों, भ्रष्टाचार, और अनियमितताओं को समाप्त कर खेल संस्कृति में संरचनात्मक सुधार लाने की दिशा में एक बड़ा कदम माना जा रहा है।
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किसी भी खेल संघ के अध्यक्ष, महासचिव और कोषाध्यक्ष अब अधिकतम 3 कार्यकाल (12 साल) से अधिक पद पर नहीं रह सकेंगे।
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आयु सीमा 70 वर्ष तय की गई है (विशेष परिस्थितियों में 75 वर्ष तक छूट संभव)।
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कार्यकारी समितियों की सदस्य संख्या अधिकतम 15 होगी, जिनमें कम से कम 2 अंतरराष्ट्रीय खिलाड़ी और 4 महिलाएं अनिवार्य होंगी।
नेशनल स्पोर्ट्स बोर्ड (NSB): शक्तिशाली नियामक संस्था
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NSB सभी राष्ट्रीय खेल संघों (NSFs) को मान्यता देने या रद्द करने का अधिकार रखेगा।
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केंद्र सरकार द्वारा नियुक्त अध्यक्ष और सदस्य इस बोर्ड का हिस्सा होंगे।
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यदि कोई खेल संघ तय समय पर चुनाव नहीं कराता, ऑडिट रिपोर्ट नहीं जारी करता या वित्तीय गड़बड़ियों में लिप्त पाया जाता है, तो NSB उसकी मान्यता स्थगित या समाप्त कर सकता है।
राष्ट्रीय खेल न्यायाधिकरण (National Sports Tribunal): न्याय का नया मंच
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खिलाड़ियों और खेल संघों से जुड़े विवादों के लिए गठित होगा यह न्यायाधिकरण, जिसमें सिविल कोर्ट जैसी शक्तियां होंगी।
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इसमें सुप्रीम कोर्ट या हाई कोर्ट के पूर्व न्यायाधीश अध्यक्ष होंगे।
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इसके फैसलों के खिलाफ केवल सुप्रीम कोर्ट में ही अपील संभव होगी, जिससे निर्णय प्रक्रिया तेज और अंतिम मानी जाएगी।
RTI कानून के दायरे में आएंगे खेल संगठन
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सभी मान्यता प्राप्त खेल संगठनों को अब सूचना के अधिकार (RTI) के अंतर्गत लाया जाएगा।
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इस प्रावधान को लेकर BCCI पहले ही विरोध जता चुका है, क्योंकि वह सरकारी फंडिंग पर निर्भर नहीं है और RTI लागू होने से पारदर्शिता के लिए उसे जवाबदेह होना पड़ेगा।
खिलाड़ियों के हित में चुनाव निगरानी पैनल
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एक राष्ट्रीय खेल चुनाव पैनल नियुक्त किया जाएगा, जो सभी NSFs में निष्पक्ष चुनाव सुनिश्चित करेगा।
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इसमें पूर्व निर्वाचन आयुक्त या मुख्य चुनाव अधिकारी जैसे अनुभवी लोग होंगे।
सरकार के पास होंगी कई विशेष शक्तियां
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कोई भी संगठन ‘भारत’, ‘राष्ट्रीय’ या ‘भारतीय’ जैसे शब्द या प्रतीक इस्तेमाल करने से पहले केंद्र से अनापत्ति प्रमाणपत्र (NOC) लेगा।
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राष्ट्रीय सुरक्षा या सार्वजनिक हित में सरकार किसी टीम की अंतरराष्ट्रीय भागीदारी रोक सकती है।
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सरकार को विधेयक की किसी भी शर्त में आवश्यकतानुसार छूट देने का भी अधिकार होगा।
BCCI के लिए सबसे बड़ी चुनौती
क्रिकेट के 2028 ओलंपिक में शामिल होने के बाद, BCCI पर NSB के साथ पंजीकरण और RTI के तहत जवाबदेही का दबाव बढ़ेगा।
लेकिन बोर्ड अब तक इस व्यवस्था के तहत आने से इंकार करता रहा है।
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