नेपाल में बड़ा संवैधानिक बदलाव संभव, जेन-जी आंदोलन के दबाव में प्रमुख पदों पर कार्यकाल सीमा तय होगी
Sandesh Wahak Digital Desk: नेपाल की अंतरिम सरकार ने बुधवार रात को एक महत्वपूर्ण कदम उठाते हुए मौजूदा संविधान में संशोधन की दिशा में आगे बढ़ने का फैसला किया है। जेन-जी (Gen-Z) प्रतिनिधियों और सरकार के बीच हुए एक 10 सूत्रीय समझौते के तहत, अब देश के प्रमुख सरकारी पदों पर कार्यकाल की सीमा (Term Limits) तय करने और आबादी के आधार पर अधिक समावेशी प्रतिनिधित्व सुनिश्चित करने पर विचार किया जाएगा।
यह समझौता नेपाल की युवा पीढ़ी के भारी असंतोष और सितंबर में हुए ‘जेन-जी’ विरोध प्रदर्शनों का सीधा परिणाम है, जिन्होंने पिछली केपी शर्मा ओली के नेतृत्व वाली सरकार को गिरा दिया था। समझौते के अनुसार, एक उच्चस्तरीय संविधान संशोधन सिफारिश आयोग का गठन किया जाएगा। इसमें संबंधित हितधारक, स्वतंत्र विशेषज्ञ और ‘जेन-जी’ प्रतिनिधि शामिल होंगे। इस आयोग को ‘जेन-जी’ प्रदर्शनकारियों की आकांक्षाओं के अनुरूप प्रगतिशील संवैधानिक बदलावों की सिफारिशों के साथ एक रिपोर्ट सौंपने का काम सौंपा गया है।
प्रमुख सरकारी पदों पर 10 साल की सीमा
युवाओं के म्यूजिकल चेयर्स (नेताओं का बार-बार सत्ता में आना-जाना) वाले असंतोष को दूर करने के लिए, आयोग यह सिफारिश करेगा कि राज्य के प्रमुख, तीनों स्तरों (संघीय, प्रांतीय और स्थानीय) के प्रमुखों और कार्यकारी निकायों के सदस्यों के लिए अधिकतम दो कार्यकाल (कुल 10 वर्ष से अधिक नहीं) की कार्यकाल सीमा तय की जाए। फिलहाल यह सीमा केवल राष्ट्रपति, उपराष्ट्रपति और स्थानीय सरकारों के प्रमुखों पर लागू होती है। संघीय या प्रांतीय सरकारों के प्रमुखों के लिए कोई कार्यकाल सीमा नहीं है।
समावेशी प्रतिनिधित्व और चुनावी सुधार
आयोग को चुनावी प्रणाली में ज़रूरी सुधारों की सिफारिश करने का काम भी सौंपा गया है, ताकि किसी खास समुदाय की आबादी के आधार पर पूरी तरह अनुरूप और समावेशी प्रतिनिधित्व सुनिश्चित किया जा सके। नेपाल में वर्तमान में प्रतिनिधि सभा और प्रांतीय विधानसभाओं के लिए एक मिश्रित चुनावी प्रणाली (फर्स्ट पास्ट द पोस्ट और आनुपातिक प्रतिनिधित्व) का उपयोग होता है, जिसमें 60% प्रतिनिधि ‘फर्स्ट पास्ट द पोस्ट’ से और 40% आनुपातिक प्रतिनिधित्व (PR) से चुने जाते हैं। इसके अलावा, आयोग प्रतिनिधि सभा और प्रांतीय सभा के लिए चुनाव लड़ने की न्यूनतम आयु 25 वर्ष से घटाकर 21 वर्ष करने के प्रस्ताव पर भी अध्ययन करेगा।

